Thursday, February 26, 2026
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आखिर क्यों बैठना पड़ा अकेली महिला को बच्चों के साथ अनशन पर। क्यों नहीं मिल रहा न्याय, क्या भ्रष्टाचार तो नहीं आ रहा आगे।

चकबंदी विभाग पर ऐसे आरोप लगना पहली बार नहीं है, समय समय पर लगते आए हैं आरोप

उत्तर प्रदेश ब्यूरो ललितपुर (सुरेंद्र कुमार)

मामला ज़िला ललितपुर थाना बानपुर क्षेत्र के अंतर्गत कुआंगाव रोड का मामला है, यह राजकुमारी नाम कि महिला चकबंदी कर्मचारियों कि भ्रष्ट शैली के कारण मजबूरन अपने बच्चों के साथ अनशन पर बैठी हुई है, वहीं महिला ने आरोप बानपुर के चकबंदी लेखापाल सतीष पर लगाए हैं, महिला का कहना है कि सतीश लेखापाल ने उसकी जमीन और उसका मकान किसी और कि जमीन में नाप दिया गया है, एक बात सोचनीय भी है कि जब वह महिला उस जगह पर मकान बना चुकी थी तब चकबंदी लेखापाल और वह जमीन वाले कहां पर थे, या फिर चंद पैसों के खेल के लिए लेखपाल महोदय ने उक्त महिला कि जमीन किसी और के चक में नाप दी हो। क्योंकि ऐसा शुरू से ही होता आ रहा है कि ग़रीबों कि बेशकीमती जमीन पर ऐसे सरकारी नुमाइंदों के साथ मिलकर जमीन उन पैसे बालों के लिए नाप दी जाती है और ग़रीब लोगों के चक ऐसी जगह पहुंचा दिए जाते हैं जहां जमीन का कोई मूल्य नहीं होता।सोचनीय बात तो यह भी है कि किसी के रहने वाला मकान भी किसी के लिए नाम दिया जा सकता है।

महिला ने लेखपाल पर आरोप लगाया है कि जिस मकान में वह महिला रह रही थी उस घर को भी किसी दूसरे के में नाप दिया है, अब उसके और उसके बच्चों के रहने के लिए कोई आशियाना नहीं बचा हुआ है, वह अब जाए तो जाए कहां, इसलिए जब तक जान है वह अनशन पर बैठी रहेगी व वहीं अनशन करते हुए अपनी जान दे देगी, क्योंकि उसके रहने के लिए कुछ बचा ही नहीं है, जो उसकी जमीन है सतीष लेखपाल ने वह 50 डिसमल जमीन और उसका घर सारा का सारा दूसरे के लिए नाप दिया है जिसके कारण वह दर दर कि ठोकरें खाने को मजबूर हो गई है, उसके जो सागौन के 10 पेड़ थे वह भी काट लिए गए हैं, उसकी तारवारी और पत्थर कि मुंडी तोड़ दी गईं हैं।एक तरफ़ सरकार ग़रीब लोगों को प्रोत्साहन देने के लिए कई प्रकार कि योजनाएं अमल में ला रही है वहीं सरकार के लालची नुमाइंदे ग़रीब लोगों कि बददुआएं भी लेने से परहेज नहीं करते।वहीं लेखपाल साहब ने इन सभी आरोपों को नकार दिया है।आखिर जब लेखपाल कह रहे हैं कि जो महिला आरोप लगा रही है वह सब झूठे हैं तो फिर वह घर किसका था जिसमें वह निवास कर रही थी, आखिर वह जमीन किसकी थी जो वह 50 डिसमल अपनी बता रही है।यदि उक्त महिला के साथ नाइंसाफी हो रही है तो प्रशासन को उचित जांच करते हुए उन दोषियों पर सख्त से सख्त कार्यवाही अमल में लानी चाहिए जो दोषी हों चाहे वह सरकारी लालची नुमाइंदे ही क्यों ना हो।मूकनायक कि प्रशासन के अपील है कि यदि महिला सही है तो उसको न्याय मिलना चाहिए।

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