Thursday, February 26, 2026
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सरसों के बीज को गलत दवा से उपचारित न करें किसान

मूकनायक

राजस्थान /वैर

(राजवीर सिंह)

सरसों की बुवाई से पहले उन्नत किस्म के बीज और दवाई की पहचान करना अति आवश्यक है। इसके अभाव में सरसों की फसल को भारी नुकसान हो सकता ।रबी फसलों की बुआई की शुरुआत होने के साथ ही किसानों ने सरसों की बुवाई शुरू कर दी है। सरसों की बुवाई राजस्थान राज्य के सभी जनपदों में प्रारंभ हो गई है सरसों अलवर, भरतपुर, टोंक, करौली, सवाईमाधोपुर आदि जनपदों में मुख़्य रूप से उगाई जाती है बुवाई करने के पहले किसानों को बीज उपचारित करने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा सुझाए गए रसायनों का ही प्रयोग करना चाहिए, भरतपुर संभाग के भरतपुर, अलवर जनपद के क़िसानों को ग़लत दवा का सुझाव देने से कुछ किसानों की सरसों जमाव के बाद पौधे सफ़ेद होने की समस्या देखी जा रही है इन दवाओं में जो थायोमेथोक्सम ३०% एफ़ एस (थायोफ़्लो) ज़्यादा मात्रा में विक्रेताओं द्वारा दी जा रही है जिसे किसान १०-१२ मिली प्रति किलो बीज की दर से उपचारित कर रहा है जो की बहुत ज़्यादा है और इसी वजह से सरसों ख़राब हो रही है ज़्यादा दवा का प्रयोग करने से काफ़ी किसान परेशान हैं कृषि विज्ञान केंद्र भरतपुर के वैज्ञानिक बताते हैं कि किसानों को पहले से उपचारित पैकेट बीज को किसी अनाधिकृत केमिकल की अत्याधिक मात्रा से उपचारित नहीं करना चाहिए, कृषि आदान विक्रेताओं को आगाह करते हुए कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के वैज्ञानिक डॉ. देवा राम बाजिया बताते हैं कि विक्रेताओं को किसी भी हालत में जो दवाएँ सरसों की फसल में अनुशंसित नहीं हैं उनको किसानों को नहीं देना चाहिए ताकि सरसों में हो रहे सफ़ेद पौधे एवं नुक़सान को बचाया जा सके । बीज उपचार करते समय इस बात का कङाई से पालन जरूर करे, सबसे पहले फफूंदनाशक , फिर कीटनाशक और अन्त मे राइजोबियम जीवाणु का प्रयोग करे। बीज पहले से उपचारित हो तो दोबारा से कदापि नही करे और बीजाई करते समय तापमान का विशेष ध्यान रखे।

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