मूकनायक
ओमप्रकाश वर्मा
राजस्थान /कोटा
पाखंड का पर्दा ओढ़कर चलते,मुखौटा पहन दुनिया को बखलते।सत्य को छुपाने की कोशिश करते,अपने मन की बात कभी ना बोलते।दिखावे की दुनिया में खो जाते,अपने असली चेहरे को छुपाते।पाखंडवाद के जाल में फंस जाते,निष्पादित आत्मा को कर जाते।तो आओ मुखौटा उतारें,सच्चाई का रास्ता चुनें।अपने मन की बात कहें,और दुनिया को दिखाएं सुनें।नखली दुनिया से निकलें,अपने असली चेहरे से बने।पाखंडवाद के जाल से निकलें,अजर आत्मा की फिर से सुने।
लेखक:आशाराम मीणा
उप-प्रबंधक,भारतीय स्टेट बैंक कोटा,राजस्थान

