मूकनायक :-ओमप्रकाश वर्मा
राजस्थान / करौली
*शिक्षक संघ (सियाराम) ने किया विरोध*
*शिक्षा मंत्री को संगठन के प्रदेश महामंत्री रामदयाल मीना ने लिखा पत्र*
महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में विभिन्न पदों पर शिक्षकों के पदस्थापन हेतु लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी
जिसमें उत्तीर्ण शिक्षकों के लिए वर्तमान में शाला दर्पण पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया आयोजित की जा रही है ,परंतु विभागीय अधिकारियों की मनमर्जी के कारण के कारण संपूर्ण काउंसलिंग प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है।
1. काउंसलिंग प्रक्रिया में शाला दर्पण पोर्टल पर दर्शाए गए महात्मा गांधी विद्यालयों की सूची में से कई विद्यालयों के नाम गुपचुप तरीके से गायब कर दिए गए हैं (यथा : mggs झारेड़ा,स्कूल id 212504,mggs महावीर जी,mggs जौंल एवं अन्य mggs स्कूल छोड़ दिए गए है) और पोर्टल पर दर्शाए गए कुछ ही विकल्पों को चुनने के लिए बाध्य किया जा रहा है जो कि सरासर गलत है जबकि पूर्व में जिला स्तर पर cdeo महोदय द्वारा जारी सूची में इन विद्यालयों में पदों को परीक्षा/इंटरव्यू के माध्यम से पदस्थापन हेतु शामिल किया गया था।
2. काउंसलिंग प्रक्रिया का यह नियम होता है कि रिक्त पदों के साथ-साथ अभ्यर्थियों की वरीयता सूची भी जारी की जाती है परंतु बिना वरीयता सूची के ही काउंसलिंग प्रक्रिया आयोजित की जा रही है जिससे अभ्यर्थियों के सामने असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है और यह काउंसलिंग न होकर एक लॉटरी सिस्टम बन गया है जो कि सरासर गलत है। संगठन विभागीय अधिकारियों की इस मनमर्जी का पूरा विरोध करता है।
3.महोदय, आनन फानन में इस लॉटरी प्रक्रिया को निपटाने की विभागीय अधिकारियों की इस जल्दबाजी के कारण अनेक पद काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर हो जाने की वजह से बहुत से शिक्षकों को दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थापन मिलने का संकट खड़ा हो गया है।
अतः संगठन ने मांग है कि महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों के लिए आयोजित की जा रही काउंसलिंग प्रक्रिया में अनियमितता पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए और नियमानुसार काउंसलिंग प्रक्रिया आयोजित करवाई जाए।साथ ही पोर्टल पर नियम सम्मत सभी mggs विद्यालयों को दर्शाते हुए अभ्यर्थियों की विषयवार वरीयता सूची तत्काल पोर्टल पर जारी की जाए। प्रदेश मंत्री ने बताया कि शीघ्र ही इस विषय पर कोई कार्यवाही नहीं की गई तो संगठन को मजबूरन इस काउंसलिंग प्रक्रिया का संपूर्ण प्रदेश में बहिष्कार करना पड़ेगा और जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्यालय और घर पर धरना प्रदर्शन भी किया जाएगा।

