भारत राष्ट्र ,भारतीय संविधान और मानव अधिकारों के रक्षार्थ अनवरत बनाए जाने वाले राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा भारत के केंद्रीय संपर्क कार्यालय का उद्घाटन दिनांक 13/08/2023 को नागपुर महाराष्ट्र में संयुक्त मोर्चा भारत के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल ऋषिकर भारती द्वारा किया गया।कार्यालय के लिए संयुक्त मोर्चा। के राष्ट्रीय महाहसचिव प्राध्यापक एड रमेश पिशे ने अपने मकान में निःशुल्क सेवा भाव से दान किया।इस कार्यक्रम में मोर्चा के मुख्य पदाधिकारियों में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनिल नागबौद्ध,केंद्रीय प्रवक्ता प्राध्यापक जावेद पासा,शोषित पिछड़ा वर्ग के नेता एवं संयुक्त मोर्चा के नवनियुक्त दिल्ली प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष अजय सिन्हा,महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर ममता मून,मध्यप्रदेश अध्यक्ष हाजी शोएब खान,केंद्रीय सचिव शिक्षा विभाग एवं जम्मू कश्मीर प्रभारी मीर अफजल ,बहुजन आंदोलन के संस्थापक सदस्य सुरेश मून,नवनियुक्त केंद्रीय संपर्क कार्यालय सचिव सोनाली,केंद्रीय सलाहकार संजय रामटेके,केंद्रीय सचिव तकनीकी विभाग इंजिनियर अरुण भगत के साथ कई विदर्भवादी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अध्यक्षता कर रहे गोपाल भारती ने कहा कि भारत देश के मेहनतकश बहुसंख्य 95 % गरीबों और शोषितों को अच्छी तरह समझ लेना होगा कि ओ पंडितों से गरीब और गुलाम इसलिए नहीं हैं की उनकी किस्मत में किसी देवी देवता ने लिख दिया है बल्कि वो इसलिए गरीब हैं कि भारत के संविधान के अनुसार समानता के अधिकार के तहत उन्हें उनका सही बटवारा नही मिला है।भाजपा हो या कोई भी पार्टी कभी सौचालय, फ्री का मोबाइल, एक मुर्गी के रेट में कुछ रुपए या 5 किलो अनाज जैसी खैरात बांटकर या झूठे वादे करके लोगों के अनमोल वोटों को खरीदने की गलत नीति पर चुनाव जीतते है उनको राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा भारत की ओर से हम अब समझा देना चाहते हैं कि अब आम जनता को भीख नहीं उनको संवैधानिक बटवारा चाहिए। प्रथक विदर्भ की मांग को भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनाव का मुद्दा बनाकर महाराष्ट्र और केंद्र की सरकारें बनाए किंतु आज सत्ता मिलने के बाद वादा खिलाफी की गई है अभी चुनाव के पहले ही भाजपा के केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और डिप्टी सी एम देवेंद्र फडणवीस की जिम्मेवारी है कि वो या तो प्रथक विदर्भ और मणिपुर में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर असफल प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने में आर एस एस का दबाव लाए।विदर्भ और पूरा देश भाजपा की मोदी सरकार के संरक्षण में चलने वाले जातिय हिंसा,नफरत और दुराचार के आतंकवाद को बहुत अच्छी तरह समझ रहे हैं।जिन दलित,ओ बी सी जैसे बहुजनो की वोटों से जिताकर गडकरी जी को नागपुर की जनता मोदी सरकार पर लगाम रखने वाला नेता समझ रहे थे आज वो मणिपुर में भाजपा सरकार के संरक्षण में महिलाओं को नंगी करके सामूहिक बलात्कार और आदिवासियों की जघन्य हत्याओं की घटनाओं पर भी पद पर बने रहने की बेबसी को एक कायरता ही माना जाएगा।वक्त आ गया कि अब ये दोनो नेता लोक सभा चुनाव के पहले अपने वादे पूरे नहीं कर सकते और महिला सुरक्षा पर भी इनसे कुछ नही हो सकता तो नैतिकता के आधार पर खुद अपने पदों से इस्थिपा देवें।

