मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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यह सृष्टि का अटल नियम है कि जो दृश्यमान है, वह परिवर्तनशील भी है और मानव शरीर भी इससे अछूता नहीं है। शारीरिक सौंदर्य—जैसे चमचमाती त्वचा, सुडौल काया और आकर्षण—समय के साथ अपनी चमक खोने लगते हैं। उम्र की ढलती लकीरें और झुर्रियां इस बात का प्रमाण हैं कि बाहरी रूप-रंग नश्वर है। यह एक सुंदर फूल की तरह है जो सुबह खिलता है और शाम तक मुरझा जाता है । इसके विपरीत, एक व्यक्ति का चरित्र, उसकी दयालुता और हृदय की पवित्रता शाश्वत होते हैं। यह वह आंतरिक सौंदर्य है जिसे समय का कोई भी थपेड़ा धुंधला नहीं कर सकता। एक मजबूत चरित्र व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रखता है।
रूप-रंग से किसी का आदर कुछ पलों के लिए हो सकता है, लेकिन सम्मान हमेशा व्यक्ति के कर्मों और सिद्धांतों से मिलता है। जब हम किसी की मदद करते हैं या किसी के प्रति दया भाव रखते हैं, तो वह भावना इतिहास बन जाती है। निश्छल और पवित्र हृदय वाले व्यक्ति के पास बैठने मात्र से शांति मिलती है। बाहरी सुंदरता केवल देखने वाले की आंख को आकर्षित करती है, लेकिन आंतरिक सुंदरता आत्मा को छूती है। शारीरिक सौंदर्य का मोह एक ना एक दिन टूटता ही है, इसलिए हमें बाहरी आवरण को संवारने के बजाय अपने चरित्र, व्यवहार और विचारों को शुद्ध करने पर ध्यान देना चाहिए। ढलती उम्र के साथ चेहरा बदल सकता है, लेकिन एक नेक दिल हमेशा अमर रहता है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

