मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मानव स्वभाव की यह सबसे प्रबल इच्छा होती है कि उसके काम और गुणों को समाज में पहचाना जाए। किसी व्यक्ति के वास्तविक गुणों की मन से की गई प्रशंसा केवल कुछ मीठे शब्द नहीं होते, बल्कि यह एक ऐसी सकारात्मक ऊर्जा है, जो सामने वाले के पूरे जीवन को बदल सकती है क्योंकि गुणों की सच्ची सराहना वह धूप है, जो मुरझाए हुए मन में भी नई उमंग भर देती है। जब हम किसी के अच्छे कार्यों या आंतरिक गुणों (जैसे ईमानदारी, धैर्य, या कड़ी मेहनत) की सच्ची सराहना करते हैं, तो सीधे उसके मनोबल पर गहरा असर पड़ता है । सराहना करने से उत्पन्न होने वाली आंतरिक खुशी व्यक्ति के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देती है । जब आप किसी की तारीफ बिना किसी स्वार्थ के करते हैं, तो आपके प्रति उसका आदर और विश्वास बढ़ जाता है । गुणों की खुलकर तारीफ करने से आपसी मतभेद और ईर्ष्या की भावनाएं भी समाप्त होती हैं और स्नेह का माहौल बनता है।
यहां यह भी गौर का विषय है कि सच्ची सराहना और चापलूसी में जमीन आसमान का अंतर होता है। चापलूसी किसी स्वार्थ या मतलब के लिए की जाती है, जो झूठी होती है। इसके विपरीत, सच्ची सराहना बिना किसी लालच के, व्यक्ति के वास्तविक गुणों को देखकर हृदय से निकलती है। लोग चापलूसी को तुरंत भांप जाते हैं, लेकिन सच्ची तारीफ उनके सीधे दिल को छूती है। इसलिए सच्ची सराहना एक ऐसा अनमोल उपहार है, जिसे देने में हमारा कुछ खर्च नहीं होता, लेकिन पाने वाले को यह जीवन भर की अमूल्य पूंजी दे जाता है। हमें अपने दैनिक जीवन में कंजूसी छोड़कर दूसरों के अच्छे गुणों को खुलकर स्वीकार करना चाहिए। ऐसा करके हम ना केवल किसी का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, बल्कि अपने रिश्तों को भी हमेशा के लिए जीवंत और मजबूत बना लेते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

