मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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इतिहास और हमारा दैनिक जीवन इस बात का गवाह है कि सबसे स्थायी और गहरे बदलाव हमेशा निस्वार्थ भाव से किए गए छोटे-छोटे प्रयासों से ही शुरू होते हैं। जब हम बिना किसी व्यक्तिगत लाभ, नाम या श्रेय की इच्छा के समाज के लिए कुछ करते हैं, तो उस कार्य में एक पवित्रता होती है। एक छोटा सा कदम—जैसे किसी भूखे को खाना खिलाना, बच्चों को शिक्षा व रोजगार के प्रति मार्गदर्शन करना, रास्ते से पत्थर हटाना, किसी बुजुर्ग व निराश व्यक्ति को संबल देना, अपने आस-पास पौधे लगाना आदि भले ही दिखने में मामूली लगे, लेकिन इसका प्रभाव दूरगामी होता है।
महापुरुषों ने भी यह सिखाया है कि हम सभी बड़े काम नहीं कर सकते, लेकिन हम छोटे-छोटे कामों को बड़े प्यार और निस्वार्थ भाव से कर सकते हैं । जब लोग बिना किसी स्वार्थ के समाज की भलाई करते देखते हैं, तो उनके भीतर भी इंसानियत और सहयोग की भावना जागृत होती है। यही चैन रिएक्शन (श्रृंखला) आगे चलकर एक बड़े सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का रूप ले लेती है। यह भी सत्य है कि समाज को बदलने की शुरुआत खुद से होती है। सरकारें या कानून व्यवस्था ऊपरी ढांचा बदल सकते हैं, लेकिन समाज की आत्मा को केवल नागरिकों का निस्वार्थ व्यवहार ही सुंदर बना सकता है। आइए, बड़ी क्रांतियों का इंतजार छोड़कर, आज ही से अपने स्तर पर छोटे और नेक बदलावों की शुरुआत करें। याद रखें, बूंद-बूंद से ही सागर बनता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

