तारबाहर में कायम है कौमी एकता और सद्भभाव की मिसाल, कांग्रेस की पकड़ मजबूत
बिलासपुर। नगर निगम के वार्ड क्रमांक 29 तारबाहर का उपचुनाव इस बार पूरे शहर की राजनीति का केंद्र बना हुआ है। लेकिन राजनीतिक चर्चा और आरोप-प्रत्यारोप के बीच एक बात जिस पर सभी की सहमति दिखाई देती है, वह है स्वर्गीय शेख गफ्फार द्वारा स्थापित आपसी सदभाव, भाईचारे और कौमी एकता की मजबूत परंपरा।
तारबाहर वार्ड 29 को वर्षों से केवल एक राजनीतिक क्षेत्र नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता की मिसाल माना जाता रहा है। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित सभी समाज के लोग लंबे समय से एकजुट होकर रहते आए हैं। स्वर्गीय शेख गफ्फार ने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की राजनीति की। यही कारण रहा कि वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि वार्ड के हर परिवार के भरोसे और सम्मान का नाम बन गए।
गफ्फार भाई ने कभी जाति या धर्म की राजनीति नहीं की। उन्होंने गरीब, मजदूर, व्यापारी, युवा, महिलाओं और हर समुदाय की समस्याओं को प्राथमिकता देकर लोगों के दिलों में स्थायी जगह बनाई। वार्ड के विकास के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी पहचान रही।
इसी मजबूत सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव का परिणाम है कि वार्ड क्रमांक 29 में कांग्रेस आज भी बेहद मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। क्षेत्र के मतदाताओं में अब भी गफ्फार परिवार और कांग्रेस के प्रति गहरा विश्वास दिखाई देता है। लोगों का मानना है कि जिस सोच ने वर्षों तक तारबाहर में भाईचारा कायम रखा, उसी सोच को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह चुनाव केवल जीत-हार का नहीं, बल्कि उस विरासत को बचाने का है जिसने तारबाहर को पूरे शहर में अलग पहचान दिलाई।
वार्ड नं 29 में शेख आजम की लगातार हो रही जनसंपर्क बैठकों और लोगों की भागीदारी से भी कांग्रेस को सकारात्मक माहौल मिलता दिखाई दे रहा है।
तारबाहर की गलियों में आज भी एक ही चर्चा सुनाई दे रही है—“गफ्फार भाई ने लोगों के दिल जीते थे, और वही प्यार आज भी कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत है।”








