मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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संसार का नियम है कि हमेशा क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। इसी संदर्भ में प्रसिद्ध कहावत है—”एक हाथ से ताली नहीं बजती।” यह छोटी सी पंक्ति मानवीय संबंधों और विवादों के मनोविज्ञान का सार अपने भीतर समेटे हुए है। कोई भी झगड़ा या बहस एकतरफा नहीं होती। जब दो विचारधाराएं टकराती हैं और उनमें से कोई भी झुकने या सुनने को तैयार नहीं होता, तब विवाद जन्म लेता है। अक्सर विवाद तथ्यों पर नहीं, बल्कि ‘कौन सही है’ के अहंकार पर टिके होते हैं। यदि एक व्यक्ति कटु वचन कहता है, तो दूसरा उससे भी तीखा प्रहार करने की कोशिश करता है। यही वह ‘दूसरा हाथ’ है जो ताली बजाने (विवाद को बढ़ाने) का काम करता है। इसी विवाद में यदि एक पक्ष खामोश हो जाए, तो बड़े से बड़ा विवाद भी वहीं थम जाता है। इसे कायरता समझना सबसे बड़ी भूल है, वास्तव में यह उच्च मानसिक परिपक्वता का परिचायक है क्योंकि जब सामने वाले को कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती, तो उसका क्रोध धीरे-धीरे शांत होने लगता है।
यहां यह गौर का विषय है कि बिना प्रतिद्वंद्वी के युद्ध संभव नहीं है। आपका मौन सामने वाले को यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्या उसका व्यवहार उचित था । प्रतिक्रिया देकर आप विवाद का हिस्सा बन जाते हैं, लेकिन मौन रहकर आप परिस्थिति के स्वामी बन जाते हैं। यहां यह सर्व विदित है कि कीचड़ में पत्थर फेंकने से छींटे आप पर ही आएँगी । इसलिए अपनी मर्यादा बनाए रखने के लिए कभी-कभी पीछे हटना भी आगे बढ़ने की एक रणनीति होती है। शब्दों में उतनी शक्ति नहीं होती जितनी मौन में होती है क्योंकि ऐसी स्थिति में शब्द अक्सर घाव देते हैं, जबकि मौन उन घावों को भरने का समय देता है।अतः जब भी विवाद की स्थिति बने, तो याद रखिए कि आपके पास ‘ताली ना बजाने’ का विकल्प हमेशा मौजूद है। आपकी एक चुप्पी भविष्य के कई पछतावे मिटा सकती है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

