रिसोड
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वर्तमान में, यह देखा गया है कि पेड़ों की हत्या बड़े पैमाने पर हो रही है। जगह-जगह सीमेंट के जंगल खड़े थे। पक्षियों का कोई उचित आश्रय नहीं है। अब हर जगह सड़क के किनारे गिने-चुने पेड़ हैं, वे पेड़ अब धूप के कारण दम तोड़ रहे हैं। इसका बड़ा परिणाम यह हुआ है कि पशु-पक्षियों को जीवित रहने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है, जिससे पक्षी प्रेमी उम्मीद जता रहे हैं कि हर कोई पहल कर घर की छत या खिड़की पर पानी और खाने की व्यवस्था करे. जानवर और पक्षी। पिछले पांच दिनों से लू के कारण कई लोग हीट स्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं.हर दिन तापमान बढ़ रहा है और तापमान 43 डिग्री से ऊपर जा रहा है, शरीर ठंडा हो रहा है. चारों ओर आर्द्र वातावरण, जलस्रोतों को सुखा रहा है। इन सबका प्रभाव पूरी सृष्टि पर महसूस होता है। फिर पक्षियों और जानवरों की क्या कहानी, सीमेंट के जंगल में पानी की एक बूंद के लिए तड़पती चिड़िया और एक घूंट पानी के लिए भटकता जानवर जिस्म का कांटा है। यह बहुत जरूरी है कि पानी के लिए पशु-पक्षियों की खामोश पुकार इंसानों तक पहुंचे। मनुष्य भौतिक सुखों के पीछे पड़ा है। रहन-सहन डिजिटल हो गया है। सीमेंट के जंगल फलफूल रहे हैं। हालांकि इससे प्रकृति का संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है। जैसे-जैसे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता है, वैसे-वैसे मौसम तंत्र भी गड़बड़ा जाता है। पशु और पक्षी विलुप्त होते जा रहे हैं। पशु-पक्षी, जिन पर प्रकृति को संतुलित करने की बड़ी जिम्मेदारी है, जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वारकरी मेडिकल के निदेशक रूपेश पाटिल बजाड़ ने अपील की है कि अगर हमें वास्तव में प्रकृति की इस संपदा को संरक्षित करना है तो समाज के हर तत्व को पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी उपलब्ध कराना जरूरी कर देना चाहिए ।
*मूकनायक समाचार रिसोड संवाद दाता अमर कानडे की रिपोर्ट* 🙏

