Thursday, June 11, 2026
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बालको–कोरबा में अंबेडकर जयंती पर सामाजिक सदभाव का अनूठा अभियान, 1000 लोगों तक पहुंच रही मदद

बालको–कोरबा में अंबेडकर जयंती पर सामाजिक सदभाव का अनूठा अभियान, 1000 लोगों तक पहुंच रही मदद

मूकनायक

कमलेश लवहात्रै

कोरबा छत्तीसगढ़

डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर बालको–कोरबा क्षेत्र में 14 अप्रैल से 29 अप्रैल तक “संवैधानिक सामाजिक सदभाव पखवाड़ा” के अंतर्गत एक प्रेरणादायी वस्तु दान अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य समाज के वंचित वर्गों, महिलाओं और मूलनिवासी समुदाय के सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।
सिद्धार्थ लोक कल्याण समिति, मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा एवं अन्य सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में शुरू हुए इस अभियान का शुभारंभ 14 अप्रैल को बालको नगर में हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश के श्रम, उद्योग एवं आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन तथा कोरबा की महापौर संजू देवी राजपूत की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन गोपाल ऋषिकर भारती द्वारा किया गया।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों की उपस्थिति में बाबा साहब की 135वीं जयंती को “संवैधानिक सामाजिक सद्भाव दिवस” के रूप में मनाया गया। अभियान के तहत 500 महिलाओं को साड़ियां तथा 500 पुरुषों व बच्चों को उपयोगी घरेलू सामग्री (बर्तन आदि) वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है, जो निरंतर जारी है।
23 अप्रैल 2026 को ग्राम रोगबहरी (बालको) में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों को वस्त्र एवं सामग्री वितरित की गई। इस दौरान महिला समाजसेवियों एवं स्थानीय पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई और जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाई।
आयोजन समिति एवं मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष गोपाल ऋषिकर भारती ने सभी सहयोगियों और दानदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अभियान केवल सहायता वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान के मूल्यों—समानता, न्याय और मानवाधिकार—के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी एक सशक्त प्रयास है।
उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वे गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक, कबीर, गुरु घासीदास, ज्योतिबा फुले, महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के सत्य, अहिंसा और सामाजिक समरसता के विचारों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
यह पहल न केवल जरूरतमंदों की सहायता कर रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ को भेदभाव, शोषण, गरीबी और बेरोजगारी से मुक्त एक आदर्श राज्य बनाने की दिशा में जनजागरण का भी कार्य कर रही है।
“आइए, गर्व से कहें—हम सब भारतीय हैं” के संदेश के साथ यह अभियान क्षेत्र में एकता, जागरूकता और संवैधानिक मूल्यों की नई मिसाल पेश कर रहा है।

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