मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सच तो यह है कि संसार में कोई भी व्यक्ति इतना महत्वपूर्ण नहीं है कि उसके बिना संसार चल नहीं सकता। हम सभी एक दूसरे पर निर्भर हैं और हर कोई अपने तरीके से महत्वपूर्ण है लेकिन, यह भी सच है कि हम अक्सर अपने आप को बहुत महत्वपूर्ण मानने लगते हैं और सोचते हैं कि हमारे बिना संसार अधूरा है। ताश के पत्ते का उदाहरण बहुत ही उपयुक्त है। जब एक पत्ता गुम हो जाता है, तो लोग जोकर को भी बादशाह बना लेते हैं। यह हमें यह सिखाता है कि संसार में कोई भी चीज या कोई भी व्यक्ति इतना महत्वपूर्ण नहीं है कि उसके बिना संसार चल नहीं सकता।
यह विचार हमें विनम्र रहने की सीख देता है। हमें अपना काम पूरी ईमानदारी से करना चाहिए, लेकिन इस गलतफहमी में भी नहीं रहना चाहिए कि हमारे बिना दुनिया ठहर जाएगी। ताश के खेल की तरह, जिंदगी भी चलती रहती है- बस मोहरे बदल जाते हैं । इसलिए स्वयं को इतना कीमती जरूर बनाएं कि आपकी कमी हमेशा महसूस होती रहे, लेकिन यह याद रखें कि विकल्प हमेशा तैयार रहते हैं ।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

