मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मौसम के साथ प्रकृति का रंग बदलना, अपनों का स्वार्थवश व्यवहार बदलना और रिश्तों की गर्माहट का फीका पड़ना, यह सब जीवन की क्षणिकता और अनिश्चितता को उजागर करते हैं । जीवन में हमेशा किसी को परखने की कोशिश मत करिए और उन्हें समझने का प्रयास अवश्य कीजियेगा। अपनों से कभी भी इतनी दूरी ना बढ़ाएं कि दरवाजा खुला हो, फिर भी खटखटाना पड़े । बदलते लोग, बदलते रिश्ते और बदलता मौसम, बेशक दिखाई ना दें, मगर महसूस जरूर होते हैं ।
अनुभव कहता है कि थोड़ा अपनों से भी सोच समझ कर बोलिए क्योंकि वो इतनी जल्दी बातें नहीं मानते, जितना जल्दी बुरा मान जाते हैं । बदलते लोग, रिश्ते और मौसम हमें यह सिखाते हैं कि हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।जो बदल गया, उसे स्वीकार करना ही जीवन में सुकून पाने का एकमात्र तरीका है, बाकी:- जिंदगी का कैलकुलेशन बहुत बार किया लेकिन, “सुख-दुःख” का “अकांउट” कभी समझा ही नहीं! जब टोटल किया तो समझ आया कि “कर्मों” के सिवा कुछ भी बैलेंस नहीं रहता ।
बिरदी चंद गोठवाल*
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

