मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सच्ची खुशी और सफलता का मार्ग दूसरों की भलाई से होकर गुजरता है। यदि आप चाहते हैं कि आपके जीवन का उपवन खुशियों के फूलों से भरा रहे, तो आपको दूसरों के जीवन में खुशियॉ बांटनी होंगी। याद रखिए, किसी के जीवन में कांटे बोकर कोई भी मनुष्य खुशी के फूलों की कल्पना नहीं कर सकता । खुशी के फूल पवित्रता की खाद-पानी से पल्लवित व पुष्पित ह्रदयरूपी क्यारी में ही खिल सकते हैं । मन की पवित्रता से बुरे से बुरे कार्य भी अच्छे परिणाम दे सकते हैं ।
मन की मलिनता दूसरों को क्षति पहुंचाने की बजाय स्वयं को क्षति पहुंचाने और स्वयं के भविष्य के पंख कुतरने को विवश करती है । किसी का कुछ अनिष्ट अथवा बुरा करने से पूर्व अपने आपको उसके स्थान पर रखकर अवश्य सोचिए । यह मानव जीवन बड़ी मुश्किल से मिलता है क्योंकि एक दूसरे को अनाप-शनाप लिखकर, भला बुरा कहकर, आपसी झगड़ों में फंसकर व कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाकर अनावश्यक जीवन बर्बाद करना मानव हित में नहीं है । अतः द्वेष भावना से दूर रहकर परस्पर प्रेम का इजहार करना और परिवार व समाज की एकता में अहम भूमिका निभाना ही हितकारी है।
बिरदी चंद गोठवाल*
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

