मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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हर इंसान अपने आप में विशिष्ट होता है। अक्सर हम समाज में लोगों को उनके पद या उनके शारीरिक आकार से आंकने या तुलना करने की भूल कर बैठते हैं, लेकिन असलियत में किसी इंसान की पहचान उसके बाहरी स्वरूप से नहीं, बल्कि उसके अच्छे व्यवहार, कर्मो और उसकी अंतरिक क्षमता से होती है क्योंकि हमारे कर्म ही हमारे चरित्र का दर्पण है | यदि कोई व्यक्ति ऊंचे पद पर होकर भी अहंकार दिखाता है, तो उसकी क्षमता व्यर्थ है। इसके विपरीत, यदि कोई साधारण व्यक्ति अपने छोटे से कार्यक्षेत्र में भी समर्पण और निपुणता दिखाता है, तो वह वास्तव में महान है ।
कबीरदास जी ने भी कहा है कि व्यक्ति अपने उच्च कर्मो से महान बनता है, ना कि उच्च कुल या पद में जन्म लेने से । एक साधारण पद पर रहकर भी यदि कोई व्यक्ति ईमानदार और निष्ठा से कार्य करता है, तो उसका योगदान किसी उच्च अधिकारी से कम नहीं है क्योंकि इंसान का मूल्य कर्म में है, ओहदे में नहीं। इसलिए हमें इंसान की पूजा नहीं, बल्कि उसके गुणों और प्रयासों का सम्मान करना चाहिए। जब हम पद के बजाय इंसान के कर्मों को महत्व देते हैं, तभी एक न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव है ।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

