सीपीआईएम ज़िला कार्यकारिणी ने किया है रामलीला मैदान में होने वाली रैली के लिए आवाहन |
मंडी हिमाचल प्रदेश | केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा थोंपी जा रही जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सीपीआई(एम) द्वारा 24 मार्च को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में की जा रही विशाल रैली में मंडी जिला से भी ज़िला मंडी से सैंकड़ों कार्यकर्ता व आम लोग दिल्ली जा रहे हैं।
माकपा के मंडी जिला सचिव कुशाल भारद्वाज ने बताया कि हिमाचल प्रदेश से जो हजारों लोग दिल्ली जा रहे हैं, उनमें मंडी जिला के हर कोने से माकपा कार्यकर्ता व आम लोग दिल्ली रैली में हिस्सा लेने जा रहे हैं। आज शाम को भी कुछ काफिले दिल्ली कूच कर रहे हैं और अधिकांश लोग एक दिन पहले ही कूच करो गए है। कुशाल भारद्वाज ने कहा कि केंद्र सरकार की स्मार्ट मीटरिंग योजना, बिजली संशोधन बिल 2025, बिजली के निजीकरण को रोकने, मनरेगा की बहाली, मजदूर विरोधी 4 लेबर कोड रद्द करने, प्रदेश का राजस्व घाटा अनुदान बहाल करने की मांग पर मंडी, बल्ह, नाचन, सुंदर नगर, जोगिंदर नगर, सरकाघाट, धर्मपुर, बालीचौकी, सिराज, निहरी व द्रंग से सैंकड़ों लोग दिल्ली जा रहे हैं।
माकपा के मंडी जिला सचिव कुशाल भारद्वाज ने कहा कि स्मार्ट मीटरिंग और निजीकरण से कंपनियां तो मालामाल हो जाएंगी, लेकिन बिजली बोर्ड खत्म हो जाएगा उपभोक्ता कंगाल हो जायेंगे आऊट सोर्स कर्मचारियों की नौकरी चली जाएगी 29 हजार सेवानिवृत कर्मचारियों की पेंशन बंद हो जाएगी तथा भविष्य में किसी को बिजली बोर्ड में नौकरी नहीं मिलेगी। केंद्र सरकार हर राज्य में बिजली के निजीकरण करने और स्मार्ट मीटरिंग को लागू करने के लिए दबाव डाल रही है। नई योजनाओं के माध्यम से केंद्र सरकार अपनी हिस्सेदारी कम कर रही है, रोजगार की गारंटी खत्म की जा रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सीमित किए जा रहे हैं, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मनरेगा को खत्म कर मोदी सरकार ने करोड़ों लोगों की आजीविका का सहारा ही छीन लिया है | Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) [VB–G RAM G] Act, 2025,
ग्राम योजना के माध्यम से केंद्र सरकार अपनी हिस्सेदारी कम कर रही है, रोजगार की गारंटी खत्म की जा रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सीमित किए जा रहे हैं, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
हिमाचल प्रदेश को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) भी समाप्त कर दी है, जिससे प्रनिश्चित ही प्रदेश की जनता को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार योजनाबद्ध तरीके से पूरे सार्वजनिक क्षेत्र को अपने दोस्त पूंजीपतियों और बड़ी कंपनियों के हाथों बेचने का काम कर रही है बिजली क्षेत्र को निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है और स्मार्ट बिजली मीटर उसी योजना का हिस्सा हैं।

