Tuesday, September 29, 2026
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भ्रष्टाचार और लापरवाही पर पर्दा डाल रहे साल्टौआ गोपालपुर BDO: पत्रकारों के शिकायतों पर ‘देख लेंगे’ कहकर काट देते हैं फोन

मूकनायक/ रिपोर्टर इंद्रसेन गौतम बस्ती/ उत्तर प्रदेश

बस्ती। विकासखंड सल्टौआ गोपालपुर में तैनात खंड विकास अधिकारी (BDO) इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में हैं। सरकारी योजनाओं में हो रही धांधली और गांव की बदहाली की शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय, साहब ने ‘मौन’ धारण कर लिया है। हद तो तब हो गई जब पत्रकारों द्वारा जनहित के मुद्दों पर सवाल पूछने पर BDO न फोन काट देते हैं, बल्कि गैर-जिम्मेदाराना जवाब देकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

ग्राम पंचायत जोगिया जोड़ी कुइयां से भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम प्रधान और रोजगार सेवक की मिलीभगत से मनरेगा में जमकर फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है। जब इस धांधली की सूचना साक्ष्यों के साथ BDO गोपालपुर को दी गई, तो उन्होंने जांच की बात कहने के बजाय सिर्फ इतना कहा— “देख लेंगे” और फोन काट दिया। आखिर साहब किसे और क्या देखने की बात कर रहे हैं, यह समझ से परे है।

ग्राम तुरकौलिया में स्थिति और भी बदतर है। अंबेडकर पार्क के बगल से गुजरने वाला मुख्य मार्ग पिछले कई महीनों से जलजमाव और गंदगी की चपेट में है।

  1. जमीनी हकीकत: रास्ते पर घुटनों तक पानी और कीचड़ है, जिससे संक्रामक बीमारियों और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।
  2. अधिकारी का झूठ: जब पत्रकार ने इस संबंध में BDO से बात की, तो उन्होंने दावा किया कि सफाई हो चुकी है।
  3. दोबारा शिकायत पर बदसलूकी: जब मौके पर जाकर देखा गया तो सफाई का नामोनिशान नहीं था। दोबारा फोन करने पर साहब ने फोन काट दिया। दूसरे पत्रकार के पूछने पर साहब का गैर-जिम्मेदाराना बयान आया— “सफाई के लिए भेजा था, नहीं हुई तो मैं क्या करूं? हो जाएगी।”
  4. बड़ा सवाल: अगर जिले के जिम्मेदार अधिकारी ही भ्रष्टाचार और गंदगी पर इस तरह का ढीठ रवैया अपनाएंगे, तो सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का क्या होगा

एक तरफ सरकार पारदर्शिता की बात करती है, वहीं साल्टौआ गोपालपुर के BDO पत्रकार का परिचय मिलते ही फोन काट देना अपनी शान समझते हैं। जनहित के मुद्दों पर सूचना मांगना या शिकायत करना अब साहब को “परेशानी” लगने लगा है।

ग्रामीणों और स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और लापरवाह अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।

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