Friday, April 17, 2026
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मूलनिवासी संघ ने ऑडिट टेंडर पर उठाए गंभीर सवाल, निरस्तीकरण की मांग के साथ आंदोलन की चेतावनी

मूलनिवासी संघ ने ऑडिट टेंडर पर उठाए गंभीर सवाल, निरस्तीकरण की मांग के साथ आंदोलन की चेतावनी

मूकनायक
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी

रायपुर, छत्तीसगढ़
मूलनिवासी संघ ने छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी ऑडिट संबंधी टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है। इस संबंध में संघ द्वारा उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

संघ ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी ऑडिट टेंडर (RFP No. 2886/STN-173048/SUDA/IA/2025, दिनांक 01 अगस्त 2025) में वैधानिक अनुपालन जैसे आयकर रिटर्न, जीएसटी एवं श्रम कल्याण कर संबंधी शर्तों को अनिवार्य किया गया है। संगठन का आरोप है कि इन शर्तों के कारण छोटे ऑडिट फर्मों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, टैक्स कंसल्टेंट्स एवं स्थानीय पेशेवरों की भागीदारी बाधित हो रही है।

संघ का कहना है कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में लंबे समय से कार्यरत छोटे एवं मध्यम स्तर के चार्टर्ड अकाउंटेंट और टैक्स कंसल्टेंट नगरीय निकायों में सेवाएं देते रहे हैं, किंतु कार्यों के अत्यधिक केंद्रीकरण और टेंडर प्रक्रिया में कठोर शर्तों के कारण स्थानीय एवं मध्यम वर्गीय पेशेवरों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि ऑडिट एवं डबल एंट्री अकाउंटिंग सिस्टम से जुड़े कार्यों में बार-बार कुछ चुनिंदा फर्मों को ही अवसर प्रदान किए जाने की स्थिति बनती दिखाई दे रही है, जिससे समान अवसर और प्रतिस्पर्धात्मक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। संघ ने मांग की है कि डबल एंट्री अकाउंटिंग सिस्टम से संबंधित कार्य भविष्य में ऐसी टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से न दिए जाएं, जिससे स्थानीय स्तर पर कार्यरत पेशेवरों का रोजगार प्रभावित हो।

 छत्तीसगढ़ नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को संबोधित ज्ञापन में संगठन ने कहा है कि राज्य के गरीब, वंचित एवं मध्यम वर्ग के लोगों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए टेंडर प्रक्रिया को अधिक समावेशी, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक बनाया जाए।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत पटेल ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन व्यापक जन आंदोलन छेड़ेगा तथा संबंधित विभाग का घेराव किया जाएगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार इस शिकायत पर गंभीरतापूर्वक विचार करेगी और टेंडर प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन कर सार्वजनिक हित एवं सामाजिक न्याय के अनुरूप निर्णय लेगी।

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