

दमोह (मध्यप्रदेश), 21 फरवरी 2026।
दि बुद्धिष्ट प्रचारक विंग छत्तीसगढ़ द्वारा धम्म प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से मध्यप्रदेश के दमोह स्थित प्रज्ञा दीप बुद्ध विहार में एक दिवसीय वैचारिक धम्म संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम रमाताई आंबेडकर महिला मंडल के तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में बुद्ध-आंबेडकर अनुयायियों, उपासक-उपासिकाओं एवं बच्चों ने सहभागिता की।
संगोष्ठी की शुरुआत त्रिशरण एवं पंचशील वाचन से हुई, जिससे वातावरण धम्ममय और प्रेरणादायी बन गया। कार्यक्रम के दौरान संविधान की उद्देशिका का वाचन ज्योति बौद्ध द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों से सम्यक प्रश्न पूछकर बौद्धिक संवाद को जीवंत बनाया तथा उत्तर देने वालों को पेन भेंट कर प्रोत्साहित किया।
इस वर्ष संगोष्ठी का मुख्य विषय था— “21वीं सदी में सावित्रीबाई फुले और माता रमाई होतीं तो कैसी होतीं?” इस विषय पर उपासक-उपासिकाओं ने अपने विचार रखे। सविता बौद्ध ‘संकल्पी’ ने विस्तार से अपने चिंतन प्रस्तुत करते हुए बताया कि आज के समय में सावित्रीबाई और माता रमाई शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के लिए किस प्रकार अग्रणी भूमिका निभातीं।
जयश्री बौद्ध ने “बौद्धों को क्या नहीं करना चाहिए” विषय पर उदाहरण सहित विस्तार से मार्गदर्शन दिया। वहीं अलका बौद्ध ने महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला तथा बोधगया में चल रहे आंदोलन में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने बौद्ध समाज के सशक्त निर्माण के लिए “बौद्ध बनो, बौद्ध लिखो, बौद्ध दिखो” का संदेश दिया।
ज्योति बौद्ध ने “बौद्धों को क्या करना चाहिए” विषय पर अपने विचार रखते हुए सम्यक आचरण, प्रज्ञा और करुणा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। सुलोचना बौद्ध ने गभ्बमंगल संस्कार से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और गीत के माध्यम से उपस्थित जनों को भावविभोर किया।
मुख्य प्रबोधन सविता बौद्ध ‘संकल्पी’ द्वारा दिया गया, जिसमें उन्होंने बौद्ध संस्कारों एवं बौद्ध पर्वों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने अपने स्वलिखित गीत के माध्यम से समाज में सम्यक वाणी, प्रज्ञा, शील और करुणा के विस्तार का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में दि बुद्धिष्ट प्रचारक विंग छत्तीसगढ़ द्वारा “बुद्ध के समकालीन भिक्षु” पुस्तक एवं वर्ष 2026 का कैलेंडर बुद्ध विहार समिति तथा उपस्थित सभी अनुयायियों को सप्रेम भेंट किया गया।
महिला मंडल की अध्यक्ष ममता भौतेकर ताई ने सभी अतिथियों और सहभागियों का आभार व्यक्त किया तथा मंगल मैत्री के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ। विंग की ओर से आशा ताई ने भी धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में उपस्थित समस्त बुद्ध-आंबेडकर अनुयायियों को यह संदेश दिया गया कि संगोष्ठी में जो भी शिक्षाएं मिलीं, उन्हें जीवन में धारण करते हुए सम्यक वाणी, मंगल मैत्री, प्रज्ञा, शील, करुणा और संस्कार के पथ पर अग्रसर रहें, ताकि समाज में समता, सद्भाव और कल्याण का विस्तार हो।

उक्त जानकारी एस आर उके क्षेत्रीय सचिव आल इंडिया समता सैनिक दल म. प्र. द्वारा प्रदान की गई।

