Thursday, February 26, 2026
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सादा जीवन, उच्च विचार केवल एक कहावत नहीं, बल्कि सार्थक जीवन जीने का है सूत्र

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आधुनिक युग में, जहाँ चकाचौंध, भौतिकवाद और दिखावा ही सफलता का पैमाना माना जाने लगा है, वहाँ ‘सादगी’ को अक्सर पिछड़ापन, गरीबी या कमजोर मानसिकता से जोड़कर देखा जाता है। समाज में यह धारणा बन गई है कि “जितनी बड़ी गाड़ी, उतना बड़ा आदमी।” लेकिन, वास्तविकता इससे बिल्कुल भिन्न है। वास्तव में, सादगी कोई कमजोरी या पिछड़ापन नहीं, बल्कि एक उच्च स्तरीय मानसिक अवस्था है, जो परिपक्वता, संतोष और मानसिक शांति का प्रतीक है।
इतिहास गवाह है कि लाल बहादुर शास्त्री, डॉ अब्दुल कलाम जैसे महापुरुषों ने ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ के सिद्धांत को अपनाकर ही राष्ट्र को नई दिशा दी। उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि महानता बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि विचारों की उच्चता में है। सादा जीवन, उच्च विचार’ का मार्ग कांटों भरा लग सकता है क्योंकि यह अनुशासन मांगता है, लेकिन इसका अंत अत्यंत सुखद है। यह हमें एक ‘मशीन’ से ‘मनुष्य’ बनाने की प्रक्रिया है। यदि हम अपनी बाहरी जरूरतों को सीमित कर लें, तो हमारे विचार इतने स्वतंत्र और ऊँचे हो सकते हैं कि हम ना केवल अपना, बल्कि पूरे समाज, परिवार व देश का कल्याण कर सकें।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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