रेल मंत्रालय ने “52 सप्ताह में 52 सुधार” के संकल्प के तहत दो बड़े सुधारों को दी स्वीकृति
मूकनायक
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी
बिलासपुर छत्तीसगढ़
भारतीय रेल में व्यापक परिवर्तन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वर्ष 2026 के लिए घोषित “52 सप्ताह में 52 सुधार” कार्यक्रम के अंतर्गत दो नए प्रमुख सुधारों की स्वीकृति की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है और भारतीय रेल अब विश्व की दूसरी सबसे बड़ी माल परिवहन सेवा के रूप में उभर चुकी है।
बेहतर ऑन-बोर्ड सेवाओं हेतु ऐतिहासिक सुधार
रेल मंत्रालय ने ट्रेनों, विशेषकर लंबी दूरी की यात्री ट्रेनों में एंड-टू-एंड निरंतर सफाई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। पहली बार सामान्य (जनरल) कोचों की सफाई को भी औपचारिक प्रणाली में पूर्ण रूप से एकीकृत किया गया है।
अब ट्रेन के प्रस्थान स्थल से गंतव्य तक निरंतर सफाई सुनिश्चित की जाएगी। पूर्व की “क्लीन ट्रेन स्टेशन” अवधारणा, जिसमें चयनित स्टेशनों पर ही गहन सफाई होती थी, को प्रतिस्थापित कर कंटीन्यूअस ऑन-बोर्ड क्लीनिंग मॉडल लागू किया जा रहा है।
सुधार के प्रमुख बिंदु:
शौचालय, कूड़ेदान, केबिन, जल उपलब्धता और छोटे विद्युत/यांत्रिक दोषों का तत्काल समाधान
भीड़ के अनुसार सफाई की आवृत्ति निर्धारित
चादर-कंबल वितरण, संग्रहण और धुलाई की जिम्मेदारी एक ही एजेंसी को
आरक्षित कोचों के कर्मचारी सामान्य कोचों में भी सफाई सुनिश्चित करेंगे
एआई-सक्षम निगरानी प्रणाली के साथ वॉर-रूम नियंत्रण केंद्र की स्थापना
एआई द्वारा उत्पन्न तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर सफाई की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि मानक पूरे नहीं पाए गए तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।
पहले चरण में विभिन्न जोनों से लगभग 80 ट्रेनों की पहचान की गई है। अगले तीन वर्षों में यह प्रणाली भारतीय रेल की सभी ट्रेनों में लागू की जाएगी।
गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों को मिलेगा “कार्गो-प्लस-प्रोसेसिंग” स्वरूप
दूसरा सुधार वर्ष 2022 में प्रारंभ की गई गति शक्ति कार्गो टर्मिनल नीति पर आधारित है। अब 124 मल्टी-मॉडल टर्मिनलों को उन्नत कर कार्गो-प्लस-प्रोसेसिंग हब में परिवर्तित किया जाएगा।
अगले पाँच वर्षों में इन टर्मिनलों की संख्या 500 से अधिक करने की योजना है।
नए सुधार की प्रमुख विशेषताएँ:
टर्मिनल परिसर में ही प्रसंस्करण की अनुमति
सीमेंट क्लिंकर से सीमेंट निर्माण, पैकेजिंग एवं रेडी-मिक्स डिस्पैच की सुविधा
खाद्यान्न प्रसंस्करण,
स्टफिंग-डी-स्टफिंग एवं अन्य मूल्य संवर्धन गतिविधियाँ
कम उपयोग वाले माल शेडों का पुनर्विकास
रेलवे द्वारा भुगतान आधारित ट्रैक एवं विद्युत रखरखाव सुविधा
वाई-कनेक्शन एवं रेल-ओवर-रेल संरचनाओं की अनुमति
मानक डिज़ाइन अपनाने पर स्वचालित स्वीकृति
अनुबंध अवधि 35 वर्ष से बढ़ाकर 50 वर्ष
मंत्री ने बताया कि इस सुधार से तीन वर्षों में लगभग ₹30,000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।
उन्होंने हाल में किए गए सीमेंट परिवहन सुधार का उल्लेख करते हुए बताया कि थोक सीमेंट परिवहन जनवरी में 95,000 टन तक पहुँच गया, जो पिछले वर्ष 40,000 टन था। इससे परिवहन लागत में जम्मू-कश्मीर में लगभग 30% तथा मिजोरम में लगभग 50% तक कमी आई है, साथ ही प्रदूषण में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
आगामी सुधारों की तैयारी
मंत्री ने जानकारी दी कि सात और सुधार प्रक्रिया में हैं, जिनमें से दो का अनावरण इसी माह तथा तीन का मार्च के प्रारंभ में किया जाएगा। 30-40 अतिरिक्त सुधारों पर भी कार्य प्रारंभ हो चुका है।
यात्री सेवाओं और माल लॉजिस्टिक्स में इन संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से भारतीय रेल वर्ष 2026 में एक व्यापक परिवर्तन अभियान की ओर अग्रसर है।


