Thursday, February 26, 2026
Homeदेशसंगठन की शक्ति और समाज की एकता में ही छिपा है, प्रगति...

संगठन की शक्ति और समाज की एकता में ही छिपा है, प्रगति का रहस्य

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
संगठन में ही शक्ति है, जो यह दर्शाता है कि एकता, सहयोग और सामूहिकता में ही व्यक्तिगत व सामाजिक विकास का रहस्य छिपा है। जब लोग एक उद्देश्य के लिए एकजुट होते हैं, तो उनकी छोटी-छोटी शक्तियाँ मिलकर एक विशाल शक्ति बन जाती हैं, जो कठिनतम चुनौतियों को आसानी से पार कर लेती है। संगठन का अर्थ सिर्फ संख्या का होना नहीं, बल्कि साझा विश्वास और अनुशासन के साथ काम करना है, जो समाज में प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है। आज के दौर में बढ़ता व्यक्तिवाद और सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाई जाने वाली कट्टरता समाज को बिखेरने का काम कर रही है। लोग अपने छोटे-छोटे स्वार्थों के लिए बड़े सामाजिक हितों की बलि दे रहे हैं।
इसके साथ ही आज के दौर में जातिवाद, सांप्रदायिकता, और संकुचित स्वार्थ सामाजिक एकता के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। जब हम ‘हम’ के बजाय ‘मैं’ को प्राथमिकता देते हैं, तो संगठन की नींव कमजोर होने लगती है। अंततः, संगठन और एकता ही वह नींव है, जिस पर प्रगति की भव्य इमारत खड़ी की जा सकती है। यदि हम व्यक्तिगत स्वार्थों को त्यागकर ‘हम’ की भावना से कार्य करें, तो ना केवल समाज बल्कि संपूर्ण राष्ट्र विश्व पटल पर गौरवान्वित होगा। प्रगति का वास्तविक रहस्य किसी तकनीक में नहीं, बल्कि हमारे आपसी प्रेम और संगठन में छिपा है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments