मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सृष्टि ने मनुष्य को अनेक उपहार दिए हैं, जिनमें सौंदर्य सबसे पहले ध्यान आकर्षित करने वाला गुण है। एक सुंदर चेहरा सहज ही सबको अपनी ओर खींच लेता है, किंतु जीवन के लंबे सफर में केवल सुंदरता पर्याप्त नहीं होती। जहाँ सौंदर्य एक प्राकृतिक उपहार है, वहीं संस्कार, निस्वार्थ प्रेम और व्यवहार एक कठिन ‘साधना’ हैं, जिन्हें व्यक्ति अपने प्रयासों और मूल्यों से अर्जित करता है। एक व्यक्ति का सुंदर होना उतना मायने नहीं रखता, जितना उसका कोमल, शांत, सुखद, सुंदर, और सौम्य होना। मधुर वाणी और शालीन व्यवहार वह चाबी है, जो बंद दिलों के दरवाजे भी खोल देती है।
सौंदर्य केवल एक आवरण है, जबकि संस्कार, निस्वार्थ प्रेम और व्यवहार हमारी आत्मा का सार हैं। एक सुंदर चेहरा यदि कटु वचन बोले तो उसकी सुंदरता फीकी पड़़ जाती है, लेकिन एक साधारण दिखने वाला व्यक्ति यदि संस्कारी और प्रेमपूर्ण हो, तो वह पूजनीय बन जाता है। इसलिए हमें प्रकृति से मिले सौंदर्य उपहार पर गर्व और अहंकार करने के बजाय अपनी साधना (संस्कार, व्यवहार और निस्वार्थ प्रेम) पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि यही वह निवेश है जिसका लाभ हमें और समाज को अनंत काल तक मिलता रहता है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

