Thursday, February 26, 2026
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बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति ने ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नागचला को एसआईए(SIA) रिपोर्ट के आधार पर वैकल्पिक स्थान जाहू में निर्माण की रखी मांग |

तकनीकी आंधार पर एस आर एशिया टीम पहले ही दे चुकी है अपना सुझाव |

ठाकुर दास भारती मंडी | बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति द्वारा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, नागचला (मंडी) से संबंधित उत्पन्न समस्याओं को लेकर अध्यक्ष एवं उपायुक्त, मंडी के समक्ष गठित विशेष विशेषज्ञ समूह को एक मांग-पत्र समिति के अध्यक्ष प्रेमचंद चौधरी की अध्यक्षता में सौंपा गया । समिति ने ज़ोर देकर कहा कि सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) रिपोर्ट 2023 के आधार पर एस.आर. एशिया टीम द्वारा यह स्पष्ट सुझाव दिया जा चुका है कि तकनीकी सर्वेक्षण के अनुसार प्रस्तावित हवाई अड्डे का निर्माण बल्ह के स्थान पर वैकल्पिक स्थल जाहू में किया जाना अधिक उपयुक्त है। अतः समिति की स्पष्ट मांग है कि बल्ह की उपजाऊ बहु-फसली कृषि भूमि पर प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की योजना को निरस्त कर इसे किसी गैर-उपजाऊ भूमि पर स्थानांतरित किया जाए।  उपरोक्त रिपोर्ट के सुझावों के अनुसार जाहू/सरकाघाट क्षेत्र में तकनीकी सर्वेक्षण कर हवाई अड्डे का निर्माण किया जाए, ताकि किसानों की आजीविका, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा की रक्षा सुनिश्चित हो सके। भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच के अध्यक्ष श्री बेली राम कोंडल ने बताया कि जून 2018 से पूर्व मुख्यमंत्री से लगातार आग्रह किया जाता रहा है कि वे बल्ह के किसानों की उपजाऊ भूमि को बचाते हुए किसी वैकल्पिक गैर-उपजाऊ स्थान पर हवाई अड्डे का निर्माण करें। किंतु तत्कालीन सरकार ने किसानों को विश्वास में लिए बिना एकतरफा निर्णय लेकर बल्ह की बहु-फसली कृषि भूमि को नष्ट करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में तैयार सामाजिक प्रभाव रिपोर्ट में भी यह तथ्य सामने आया है कि मंडी-हमीरपुर के मध्य स्थित जाहू क्षेत्र हवाई अड्डे के लिए अधिक उपयुक्त है, जहाँ भूमि अपेक्षाकृत बंजर/कम उपजाऊ है और जिसमें लगभग 80% सरकारी तथा 20% निजी भूमि शामिल है। इससे बल्ह की तुलना में विस्थापन भी बहुत कम होगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले चार वर्षों से यह परियोजना पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, आर्थिक मूल्यांकन तथा पुनर्वास एवं पुनर्निवासन योजना के बिना आगे बढ़ाई जा रही है, जबकि बल्ह क्षेत्र स्वयं एक घोषित बाढ़-प्रभावित क्षेत्र है। यह भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 का उल्लंघन है। बहु-फसली कृषि भूमि का अधिग्रहण खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। साथ ही किसानों को केवल सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा दिया जा रहा है, जो वास्तविक भूमि मूल्य एवं आय से अत्यंत कम है। हाल ही में गठित समिति का गठन भी भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 का उल्लंघन है। हिमाचल किसान सभा  के जिला सचिव रामजी दास ने कहा कि बल्ह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से एक समृद्ध कृषि क्षेत्र रहा है, जिसे “मिनी पंजाब” के नाम से भी जाना जाता है। भूमि सुधार कानून के बाद किसानों को संघर्ष के फलस्वरूप मालिकाना हक मिला तथा इंडो-जर्मन एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट के माध्यम से आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती की शुरुआत हुई। आज बल्ह नकदी फसलों, विशेषकर सब्जी उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। टमाटर उत्पादन में बल्ह (मंडी) हिमाचल प्रदेश में सोलन के बाद दूसरे स्थान पर है, जिससे लगभग 400 करोड़ रुपये की कृषि आधारित नकद अर्थव्यवस्था संचालित हो रही है। प्रस्तावित हवाई अड्डे से लगभग 2,500 परिवार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे तथा लगभग 2,000 कृषि मजदूर, जिनमें प्रवासी श्रमिक भी शामिल हैं, बेरोजगार हो जाएंगे। इस प्रकार कुल मिलाकर 12,000 से अधिक लोगों की आजीविका संकट में पड़ जाएगी। इसके अतिरिक्त डेयरी, रेशम उत्पादन, भेड़-बकरी पालन, मुर्गी पालन तथा निर्माण व मशीनरी आधारित छोटे उद्योग भी पूरी तरह प्रभावित होंगे। उन्होंने बताया कि बल्ह क्षेत्र में भू-जल स्तर मात्र 10–12 फुट पर उपलब्ध है और आधुनिक सिंचाई सुविधाओं के कारण किसान तीन से चार फसलें लेते हैं। प्रस्तावित हवाई अड्डे से लगभग 15 सिंचाई योजनाएँ और 15 पेयजल योजनाएँ पूरी तरह समाप्त हो जाएँगी । समिति  के सचिव नंदलाल वर्मा ने बताया कि प्रस्तावित क्षेत्र पूर्व में कई बार भीषण बाढ़ का शिकार रहा है। वर्ष 1962, 2018, 2023 एवं 2025 की बाढ़ में भारी नुकसान हुआ है। अगस्त 2018 में प्रस्तावित हवाई पट्टी क्षेत्र का लगभग 80% हिस्सा जलमग्न हो गया था। इस क्षेत्र को 7–9 मीटर ऊँचा उठाने की योजना से और अधिक भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता पड़ेगी, जिससे और अधिक किसान विस्थापित होंगे। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित हवाई अड्डे हेतु 6 गाँवों की लगभग 3,500 बीघा भूमि अधिग्रहित की जानी है, जिसमें 3,040बीघा निजी और 460 बीघा सरकारी भूमि शामिल है। लगभग 2,000 मकान एवं गौशालाएँ समाप्त हो जाएँगी। इसके साथ ही क्षेत्र का एकमात्र खेल मैदान, दो 10+2 स्कूलतथाएक प्राथमिक विद्यालय भी नष्ट हो जाएगा। परियोजना की जद में आने वाला डोयडा जंगल (लगभग 25 एकड़) सदियों पुराना है, जहाँ विविध पक्षी एवं वन्यजीव निवास करते हैं। इसके नष्ट होने से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा और स्थानीय लोगों के वन अधिकार समाप्त हो जाएंगे। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष प्रेमचंद चौधरी के अतिरिक्त सचिव नंदलाल वर्मा, पूर्व प्रधान छात्डू बलराज चौधरी, पूर्व प्रधान कन्सा चौक श्याम लाल चौधरी, कैप्टन बलदेव चौधरी, जगदीश चंद, रूपलाल, पन्ना लाल चौधरी, राम सिंह, जय राम सैनी, पूरन चंद सैनी, सरवन कुमार, सुनील वर्मा, पवन वालिया, राजू वालिया, दिला राम (पूर्व सैनिक), भूमि अधिग्रहण प्रभावित मंच (हि.प्र.) के अध्यक्ष बेली राम कोंडल, हिमाचल किसान सभा के जिला सचिव रामजी दास, जोगिंदर वालिया, गुलाम रसूल, हेमराज सहित अनेक किसान प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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