Thursday, February 26, 2026
Homeदेशएक विकसित समाज वह है, जहाँ लिंग के आधार पर ना हो...

एक विकसित समाज वह है, जहाँ लिंग के आधार पर ना हो भेदभाव

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति केवल ऊँची इमारतों या तकनीकी विकास से नहीं, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि वह अपने नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है। जब हम लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करने की बात करते हैं, तो हम केवल एक नैतिक विचार की बात नहीं कर रहे होते, बल्कि एक सशक्त राष्ट्र की नींव रख रहे होते हैं। लिंग आधारित भेदभाव का अंत किसी एक दिन या कानून से नहीं, बल्कि हमारी सोच के बदलाव से होगा। जब हम लिंग के आधार पर भेदभाव को समाप्त करते हैं, तो हम केवल एक समूह का भला नहीं करते, बल्कि पूरे मानवता के विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
एक विकसित समाज का मूल आधार लैंगिक समानता है, जहाँ पुरुष, महिला और अन्य लिंग भेद के बिना शिक्षा, रोजगार और निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान भागीदार होते हैं। सच्चा विकास तभी संभव है, जब समाज रूढ़िवादी मान्यताओं को छोड़कर सभी के लिए समान अवसर, सुरक्षा और आर्थिक अधिकार सुनिश्चित करे। यह समानता ना केवल न्यायपूर्ण है, बल्कि राष्ट्र की डीजीपी को बढ़ाने और सामाजिक प्रगति के लिए अनिवार्य है। लैंगिक समानता केवल न्याय का मामला नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय और सामाजिक समृद्धि के लिए अनिवार्य है। एक सही मायने में विकसित समाज वही है जो रूढ़िवादी सोच से ऊपर उठकर हर व्यक्ति को अपनी प्रतिभा दिखाने का समान अवसर प्रदान करता है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments