मूकनायक/ दुर्गेंद्र सम्राट ब्यूरो प्रभारी बस्ती/ उत्तर प्रदेश
संतकबीर नगर। राजधानी लखनऊ स्थित माता रमाबाई अंबेडकर स्मारक पार्क में कार्यरत एक कर्मचारी की इलाज के अभाव और आर्थिक तंगी के चलते हुई मौत ने कर्मचारियों की कार्यस्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक कर्मचारी की पहचान निर्मल प्रसाद पुत्र रामफेर के रूप में हुई है, जो मूल रूप से ग्राम छपिया छितौना पोस्ट सालेहपुर, जनपद संत कबीर नगर के निवासी थे। रविवार को अपराह्न करीब तीन बजे लंबी बीमारी से जूझते हुए उन्होंने दम तोड़ दिया।
परिजनों के अनुसार निर्मल प्रसाद बीते तीन महीनों से गंभीर रूप से बीमार थे। बीमारी के कारण वे नियमित रूप से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो पा रहे थे, जिसके चलते उनका वेतन रोक दिया गया। लगातार वेतन न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हो गई कि वे समय पर इलाज तक नहीं करा सके। परिजनों का कहना है कि यदि उन्हें समय से इलाज और आर्थिक सहयोग मिल जाता, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।
बताया जा रहा है कि निर्मल प्रसाद की नियुक्ति बसपा शासनकाल के दौरान माता रमाबाई अंबेडकर स्मारक पार्क में हुई थी। उस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती की गई थी, लेकिन वर्षों बाद भी इन कर्मचारियों को बेहद अल्प वेतन पर काम करना पड़ रहा है। ग्रामीणों और उनके परिजनों का आरोप है कि वहां कार्यरत कर्मियों के लिए न तो समुचित चिकित्सा सुविधा है और न ही बीमारी की स्थिति में वेतन सुरक्षा की कोई ठोस व्यवस्था। चिकित्सा अवकाश लेने पर वेतन रोक दिए जाने की व्यवस्था ने कई परिवारों को आर्थिक संकट में डाल दिया है।
ग्रामीणों ने बताया कि निर्मल प्रसाद परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी और बच्चे हैं। वे लखनऊ में नौकरी कर जो सीमित आय प्राप्त करते थे, उसी से किसी तरह परिवार का भरण-पोषण होता था। वेतन बंद होते ही घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई। इलाज के लिए पैसे न होने के कारण न तो जरूरी जांच हो सकी और न ही किसी बड़े अस्पताल में उनका समुचित उपचार हो पाया। धीरे-धीरे उनकी हालत बिगड़ती चली गई और अंततः उनकी मौत हो गई।
गांव में इस घटना के बाद शोक की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्मल प्रसाद बेहद सरल, मेहनती और जिम्मेदार व्यक्ति थे। वे अपने परिवार के लिए दिन-रात मेहनत करते थे। उनकी अचानक मौत से पूरा परिवार सदमे में है। पत्नी और बच्चे बेसहारा हो गए हैं और उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीण अजय कुमार, रमेश प्रसाद और सोनू कुमार ने बताया कि निर्मल प्रसाद अत्यंत गरीब परिवार से थे। यदि विभाग की ओर से समय रहते उन्हें आर्थिक सहायता या चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा दी जाती, तो यह दुखद घटना टाली जा सकती थी। ग्रामीणों ने मांग की है कि मृतक के परिवार को विभागीय सहायता राशि दी जाए और किसी एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराया जाए, ताकि परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके।
यह मामला केवल एक कर्मचारी की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था की पोल खोलता है, जिसमें अल्प वेतन पर काम करने वाले कर्मचारियों को बीमारी की स्थिति में भी कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती। सवाल यह है कि क्या संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मानवीय सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं होनी चाहिए?

