मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जिम्मेदारी एक ऐसा अटूट कवच है, जो व्यक्ति को ना केवल सही दिशा में प्रवृत्त करता है, बल्कि उसे समाज में सम्मान, विश्वास और गरिमापूर्ण स्थान भी प्रदान करता है। जिम्मेदार व्यक्ति अपने कार्यों के परिणामों को स्वीकार करते हुए, समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करता है, जिससे वह भरोसेमंद बनता है। यह आत्म-विकास, चरित्र निर्माण और एक सुव्यवस्थित समाज के निर्माण की नींव है, जो व्यक्तिगत विकास को सामाजिक प्रगति से जोड़ती है। समाज में हर व्यक्ति सम्मान की तलाश में रहता है, लेकिन सम्मान माँगा नहीं जाता, इसे अर्जित किया जाता है। इस अर्जन का सबसे सशक्त माध्यम जिम्मेदारी है । जब कोई व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों को स्वीकार करता है, तो वह ना केवल अपना विकास करता है, बल्कि समाज के लिए एक विश्वसनीय स्तंभ बन जाता है।
अक्सर लोग जिम्मेदारी को ‘बंधन’ समझते हैं, जबकि वास्तव में यह स्वतंत्रता का उच्चतम रूप है। बिना जिम्मेदारी की स्वतंत्रता उच्छृंखलता बन जाती है, जो अंततः अपमान का कारण बनती है। जिम्मेदारी कोई बोझ नहीं, बल्कि वह अवसर है, जो हमें यह सिद्ध करने का मौका देता है कि हम समाज के लिए उपयोगी हैं। जो व्यक्ति जिम्मेदारी से भागता है, वह धीरे-धीरे अपनी प्रासंगिकता और सम्मान दोनों खो देता है। इसके विपरीत, जिम्मेदारी को कवच की तरह धारण करने वाला व्यक्ति हर परिस्थिति में अडिग रहता है और समाज में सिर उठाकर जीता है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

