अटल विश्वविद्यालय में “सुजलाम–सुफलाम” के अंतर्गत पर्यावरण चेतना का सशक्त संदेश
मूकनायक छत्तीसगढ़
बिलासपुर।
अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर में “प्रकृति की रक्षा – भविष्य की सुरक्षा” विषय पर “सुजलाम–सुफलाम” अभियान के अंतर्गत एक प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी जागरूकता व्याख्यान का आयोजन विश्वविद्यालय के सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन तथा प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को जागृत करना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की आदतें यदि बचपन से विकसित की जाएँ, तो वही आदतें भविष्य में समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी पूँजी सिद्ध होती हैं। उन्होंने उपयोगवादी जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन लाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजेश जैन, अखिल भारतीय पर्यावरण प्रमुख ने “सुजलाम–सुफलाम” की अवधारणा को सरल शब्दों में समझाते हुए जल को जीवन का मूल आधार बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य भोजन के बिना कुछ दिन जीवित रह सकता है, जल के बिना सीमित समय तक, किंतु वायु के बिना एक क्षण भी संभव नहीं है—इसलिए वृक्षों का संरक्षण और जल संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को वृक्षारोपण तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए दैनिक जीवन में छोटे-छोटे प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में गणेश जी (विभाग प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) तथा अक्षय अलकारी (प्रांत संयोजक, बिलासपुर) की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण जैसे सामाजिक दायित्वों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन एवं अतिथि परिचय डॉ. अतुल दुबे द्वारा सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली ढंग से किया गया, वहीं एंकरिंग की भूमिका डॉ. महेंद्र मेहता ने निभाई। कार्यक्रम के अंत में डॉ. तारनीश गौतम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथियों, विशिष्टजनों, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा विश्वविद्यालय को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक मॉडल संस्थान के रूप में स्थापित करने की दिशा में सहायक हैं।
कार्यक्रम में डॉ. गौरव साहू, डॉ. अंकुर शुक्ला, डॉ. सुमोना भट्टाचार्य, डॉ. पूजा पांडे, डॉ. हमिद अब्दुल्ला, डॉ. जितेंद्र गुप्ता, डॉ. एच. एस. होता, नेहा रतिया सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी इस प्रकार के नैतिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय चेतना से जुड़े कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन की प्रतिबद्धता व्यक्त की।


