Friday, April 17, 2026
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धम्मपद वाणी

यस्स पापं कतं कम्मं, कुसलेन पिधीयति।
सोमं लोकं पभासेति, अब्भा मुत्तोव चन्दिमा।।

अर्थात – जो अपने पहले (वर्तमान पूर्व)किये हुए पाप कर्म को वर्तमान के कुशल कर्मों से ढक लेता है, वह मेघ मुक्त चन्द्रमा की भांति इस लोक को खूब भासमान (प्रकाशित) करता है।
साधु, साधु, साधु
भवतु सब्बं मगलं
*✍️ *बौद्धाचार्य पूरणमल बौद्ध प्रदेश अध्यक्ष दि बुद्धिष्ट सोसायटी आफ़ इंडिया (भारतीय बौद्ध महासभा) राजस्थान (दक्षिण)*

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