Thursday, February 26, 2026
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धम्मपद वाणी

अत्तना हि कतं पापं अत्तना संकिलिस्सति अत्तना हि कतं पापं अत्तना संकिलिस्सति सुद्बि असुद्बि पच्चत्तं नाञ्ञो अञ्ञं विसोधये

अर्थ= अपने द्वारा किया गया पाप ही अपने को मैला करता है, स्वयं पाप न करे तो आदमी आप ही विशुद्ध बना रहे, शुद्धि -अशुद्धि तो प्रत्येक मनुष्य की अपनी अपनी ही है, अपने अपने ही अच्छे बुरे कर्मों के परिणामस्वरूप है। कोई दूसरा भला किसी दूसरे को कैसे शुद्ध कर सकता है कैसे मुक्त कर सकता है?

साधु, साधु, साधु
✍️बौद्धाचार्य पूरणमल बौद्ध प्रदेश अध्यक्ष दि बुद्धिष्ट सोसायटी आफ़ इंडिया राजस्थान (दक्षिण)

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