Thursday, February 26, 2026
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जब तक विकास की धारा अंतिम पायदान पर खड़े़ व्यक्ति (अंत्योदय) तक नहीं पहुंचती, तब तक गणतंत्र का संकल्प रहेगा अधूरा

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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75 से अधिक वर्षों की लोकतांत्रिक यात्रा के बाद, 26 जनवरी को भारत गणतंत्र दिवस मना रहा है, जो संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता और एकता का प्रतीक अवश्य है, परंतु यह विडंबना ही है कि तेजी से विकास होने के बावजूद, भारत का लोकतंत्र निरक्षरता, गरीबी, महिलाओं के खिलाफ भेदभाव, जातिवाद, अंधविश्वास और सांप्रदायिकता, क्षेत्रवाद, भ्रष्टाचार, राजनीति के अपराधीकरण और हिंसा आदि की गम्भीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। जातिवाद, लैंगिक भेदभाव और शिक्षा का अभाव अभी भी समाज के एक बड़े वर्ग को मुख्यधारा से दूर रखता है। अदालतों में लंबित करोड़ों मामले आज भी एक बड़ी बाधा हैं। ‘न्याय में देरी, न्याय ना मिलने के बराबर है ।
भारत की सबसे बड़ी चुनौती अमीरी और गरीबी के बीच बढ़़ती खाई है। हालांकि जीडीपी बढ़़ रही है, लेकिन धन का संकेंद्रण कुछ ही हाथों में है। युवाओं के लिए उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार पैदा करना आज भी एक विकट समस्या बनी हुई है । वहीं प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौतियों में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, और राजनीति का अपराधीकरण शामिल है। 75 साल की उपलब्धियाँ अतुलनीय हैं, लेकिन इन चुनौतियों का सामना किए बिना ‘विकसित भारत’ का सपना अधूरा है। गणतंत्र की सार्थकता तभी है जब संविधान द्वारा दिए गए न्याय, स्वतंत्रता और समानता के अधिकार हर नागरिक तक समान रूप से पंहुँचें।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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