मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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स्वामी विवेकानंद का यह अमर संदेश, “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए”, यह ना केवल एक वाक्य है, बल्कि सफलता का मूलमंत्र है और यह संदेश युवाओं को आलस्य त्यागकर, आत्मबल जगाकर, अपने उद्देश्य के प्रति निरंतर कर्मठ रहने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करता है । यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक जीवन-मंत्र है जो आत्म-बोध, दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम के माध्यम से असाधारण सफलता प्राप्त करने का मार्ग दिखाता है। खुद को कमजोर समझना पाप और घातक है।
अक्सर लोग काम शुरू तो करते हैं, लेकिन बाधाएं आने पर उसे बीच में ही छोड़ देते हैं। यह संदेश हमें सिखाता है कि जब तक मंजिल मिल ना जाए, तब तक विश्राम करना वर्जित है। यह मंत्र हमें यह भी सिखाता है कि मनुष्य की आत्मा अनंत शक्तिशाली है। यदि हम अपनी इच्छाशक्ति को जागृत कर लें और बिना रुके प्रयास करें, तो दुनिया का कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

