मूकनायक न्यूज/एम एस गौतम/सिरोही/राजस्थान।
सिरोही: 22 जनवरी 2026: सिरोही जिला मुख्यालय पर प्रस्तावित रैली को जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री के दौरे के कारण रद्द कर दिया। यह रैली बामसेफ़ तथा भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम के आह्वान पर आयोजित की जानी थी। रैली के रद्द होने से नाराज कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं ने मजबूरन ज्ञापन सौंपने का फैसला किया। रैली का उद्देश्य ओबीसी की जाति आधारित गिनती की मांग, कटक (उड़ीसा) में बामसेफ तथा भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन की अनुमति को आरएसएस-बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकार द्वारा रद्द करने के विरोध, लोकतंत्र और संविधान को बचाने, आदिवासियों को उनके जल, जंगल और जमीन से बेदखल करने के विरोध तथा लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए चुनावों में ईवीएम मशीन के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान करवाने की मांग को लेकर था।रैली का नेतृत्व कर रहे बहुजन क्रांति मोर्चा के जिला संयोजक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सुंदर लाल मोसलपुरिया ने बताया कि प्रशासन के इस फैसले से उन्हें काफी निराशा हुई है। उन्होंने कहा कि रैली शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित की जानी थी, लेकिन मुख्यमंत्री के दौरे का हवाला देकर इसे रद्द कर दिया गया। “हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों पर यह एक हमला है। हमने मजबूरन ज्ञापन सौंपा, लेकिन हमारी मांगें जारी रहेंगी,रैली के रद्द होने के बाद आयोजित सभा में कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपने वक्तव्य दिए। मोसलपुरिया ने कहा, “यह फैसला न केवल हमारे अधिकारों का हनन है, बल्कि यह दर्शाता है कि सरकार अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों की आवाज को दबाना चाहती है। ओबीसी की जाति गणना और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के बिना सच्चा लोकतंत्र संभव नहीं।”राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा राजस्थान के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट दशरथ सिंह आढ़ा ने अपने वक्तव्य में कटक अधिवेशन की अनुमति रद्द करने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “केंद्र और राज्य सरकारें आरएसएस-बीजेपी की नीतियों के तहत संगठनों को दबा रही हैं। यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। हम लोकतंत्र बचाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।”एडवोकेट नरेंद्र पाल सिंह ने चुनावों में ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर की मांग पर जोर देते हुए कहा, “ईवीएम में पारदर्शिता नहीं है, जो चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। बैलेट पेपर से चुनाव करवाने से लोकतंत्र मजबूत होगा और जनता का विश्वास बढ़ेगा।”एडवोकेट हरिओम दत्ता ने आदिवासियों के मुद्दे पर बोलते हुए कहा, “जल, जंगल और जमीन आदिवासियों का मूल अधिकार है। सरकार की नीतियां उन्हें बेदखल कर रही हैं, जो असंवैधानिक है। हम इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे।”एडवोकेट प्रकाश धवल ने अपने वक्तव्य में संविधान बचाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र की रक्षा के लिए ऐसे विरोध प्रदर्शन जरूरी हैं। प्रशासन का यह फैसला दमनकारी है, लेकिन हम हार नहीं मानेंगे।”ज्ञापन सौंपने के दौरान एडवोकेट आनंद देव सुमन, एडवोकेट सीमा खत्री, एडवोकेट हिमांशी, एडवोकेट संजय माली, एडवोकेट गोविन्द राणा, एडवोकेट राजेश मेघवाल, एडवोकेट मुनव्वर हुसैन, एडवोकेट ओम प्रकाश दहिया, एडवोकेट ऋत्विक सिंह, एडवोकेट कौशिक धवल, एडवोकेट अरविंद एडवोकेट रामलाल, किशन कुमार मीणा, बाबूलाल मीणा, नेमाराम गोयली, अशोक कुमार मकरोड़ा, छगनलाल मेघवाल, मगना राम, वजाराम , ओबाराम, चेताराम,नाथुराम उपस्थित रहे। इन सभी ने एकजुट होकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों को दोहराया। सिरोही जिले में विभिन्न सामाजिक संगठन अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे भविष्य में बड़े स्तर पर आंदोलन आयोजित करेंगे यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं। जिला प्रशासन ने रैली रद्द करने के फैसले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया।

