मूकनायक/ दुर्गेंद्र सम्राट ब्यूरो प्रभारी बस्ती/ उत्तर प्रदेश
बस्ती। मनरेगा घोटाले की ब्रेकिंग खबर सामने आने के बाद अब एक और गंभीर पहलू उजागर हुआ है। खबर प्रकाशित/प्रसारित होने के बाद एक व्यक्ति द्वारा पत्रकार को फोन कर कहा गया कि जिस महिला मेट के नाम से मनरेगा में हाजिरी लगाई जा रही है, उसकी आईडी बनाकर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा हाजिरी अपलोड की जाती है। कॉल करने वाले व्यक्ति ने यह भी कहा कि “खबर डिलीट कर दीजिए, मैं आपसे आकर मिलूंगा।”
यह कथन साफ तौर पर यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि खुलासे के बाद भी दबाव बनाकर खबर दबाने की कोशिश की जा रही है। जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता और ढीला रवैया ही ऐसे भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहा है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस पूरे खेल का जिम्मेदार कौन है?
मनरेगा में बड़ा फर्जीवाड़ा, एक ही फोटो से तीन परियोजनाओं में 90 मजदूरों की हाजिरी। विकासखंड रामनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत दरियापुर जंगल में मनरेगा योजना के तहत बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड में जहां एक साथ तीन परियोजनाओं पर कुल 90 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज दिखाई जा रही है, वहीं ऑनलाइन एनएमएमएस (NMMS) ऐप में अपलोड की गई तस्वीरें स्वयं इस घोटाले की गवाही दे रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एनएमएमएस पोर्टल पर तीनों अलग-अलग परियोजनाओं के लिए एक ही फोटो अपलोड की गई है। फोटो में दिख रहे व्यक्ति और कार्यस्थल का परियोजना विवरण से कोई मेल नहीं बैठता। इससे स्पष्ट है कि डिजिटल हाजिरी पूरी तरह फर्जी तरीके से दर्ज की गई और बिना कार्य कराए मजदूरों की मौजूदगी दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि एक ही फोटो को अलग-अलग तारीख और कार्य नाम के साथ अपलोड कर तीनों परियोजनाओं में मजदूरों की उपस्थिति दर्शाई गई। जबकि हकीकत यह है कि मौके पर न मजदूर मिले और न ही कोई कार्य प्रगति पर दिखाई दिया। पूरा खेल केवल कागजों और मोबाइल ऐप तक सीमित रहा।
महिला मेट पर गंभीर आरोप, नियमों की उड़ाई गई धज्जियां
इस पूरे मामले में महिला मेट अनीता देवी पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने फर्जी फोटो सेशन कराकर एनएमएमएस में हाजिरी अपलोड की। इतना ही नहीं, महिला मजदूरों के नाम पर पुरुषों की फोटो लगाकर उपस्थिति दर्ज की गई, जो नियमों का खुला उल्लंघन है और मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
जिम्मेदार अधिकारी मौन, मिलीभगत की आशंका
मनरेगा नियमों के अनुसार एपीओ, जेई और ग्राम सचिव की जिम्मेदारी होती है कि वे कार्यस्थल का भौतिक निरीक्षण करें, लेकिन दरियापुर जंगल के मामले में इन अधिकारियों की चुप्पी और लापरवाही ने संदेह को और गहरा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नहीं।
लोगों का कहना है की – तकनीकी जांच और सख्त कार्रवाई हो एनएमएमएस में अपलोड सभी फोटो की तकनीकी जांच कराई जाए, दोषी मेट, ग्राम प्रधान, सचिव और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो तथा फर्जी भुगतान की रिकवरी सुनिश्चित की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ऑनलाइन सिस्टम में सबूत साफ मौजूद हैं, तो कार्रवाई में देरी क्यों?

