
मूकनायक/ बिलासपुर
फातिमा शेख भारत की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका और महान समाज सुधारक थीं। उन्होंने महात्मा ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर 1848 में पुणे में बालिकाओं और वंचित वर्गों के लिए शिक्षा का द्वार खोला। उस समय जब समाज में स्त्रियों और दलितों को पढ़ना-लिखना वर्जित माना जाता था, फातिमा शेख ने साहस और समर्पण के साथ शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कार्य किया।
उन्होंने न केवल विद्यालय संचालन में योगदान दिया, बल्कि सामाजिक भेदभाव और रूढ़ियों के विरुद्ध भी संघर्ष किया। शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम मानने वाली फातिमा शेख का जीवन हमें समानता, भाईचारे और न्याय का संदेश देता है।
उनका योगदान भारतीय शिक्षा और सामाजिक सुधार के इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा।फातिमा शेख जी को जन्म दिवस पर कोटि-कोटि नमन।

