Thursday, February 26, 2026
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आरएसएस, बीजेपी पर बामसेफ अधिवेशन रोकने का आरोप: बहुजन संगठनों नें राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।

ओबीसी की जाति आधारित जनगणना के मुद्दे को समर्पित भारत मुक्ति मोर्चा व बामसेफ का राष्ट्रीय अधिवेशन कटक(ओड़िशा) में होना था।

मूकनायक न्यूज/दिलीप कुमार/सिरोही(राजस्थान)

सिरोही: बुधवार को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, भारत मुक्ति मोर्चा, बहुजन क्रांति मोर्चा एवं राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिला कलेक्टर सिरोही के माध्यम से सौंपा गया। ज्ञापन में आरएसएस और बीजेपी पर षड्यंत्रपूर्वक बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन को रोकने का आरोप लगाया गया है।ज्ञापन सौंपते हुए बहुजन क्रांति मोर्चा के जिला संयोजक एडवोकेट सुंदर लाल मोसलपुरिया ने बताया कि यह राष्ट्रीय अधिवेशन कटक (उड़ीसा) में आयोजित होना था, जो ओबीसी की जाति आधारित जनगणना के मुद्दे को समर्पित था। इसमें देशभर के वक्ताओं द्वारा इस विषय पर गहन विश्लेषण किया जाना प्रस्तावित था। अधिवेशन रोके जाने से ओबीसी समाज सहित देशभर में भारी आक्रोश व्याप्त है।संगठनों ने भारत सरकार एवं उड़ीसा सरकार की भूमिका को संविधान विरोधी बताते हुए इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया। ज्ञापन में कहा गया कि अधिवेशन को रोकना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b) और 19(1)(c) का उल्लंघन है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और संगठन बनाने के अधिकार की गारंटी देता है। साथ ही, अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का भी हनन बताया गया है। इस अवसर पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, राजस्थान के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष एडवोकेट दशरथ सिंह आढ़ा ने कहा कि यह केवल संगठनों के अधिकारों का हनन नहीं, बल्कि पूरे बहुजन समाज की आवाज को दबाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि संगठन इस मुद्दे पर संवैधानिक तरीके से संघर्ष करेंगे और आंदोलन को और तेज किया जाएगा।बहुजन संगठनों के अनुसार, इस घटना से देशभर में असंतोष बढ़ रहा है। विरोध को और मजबूती देने के लिए 22 फरवरी को नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय पर एक विशाल रैली आयोजित करने की घोषणा की गई है। रैली का उद्देश्य अधिवेशन रोके जाने के विरोध में जनजागरण करना और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग को प्रमुखता से उठाना है।ज्ञापन एडवोकेट सुंदर लाल मोसलपुरिया के नेतृत्व में सौंपा गया। इस दौरान एडवोकेट नरेंद्र पाल सिंह राव, एडवोकेट दशरथ सिंह आढ़ा, मोहनलाल मीणा, नगाराम, संजय माली, आनंद देव सुमन, एडवोकेट रामलाल राणा, एडवोकेट मुन्नवर हुसैन व गोविंद राणा, नथाराम नेमाराम, धन्नाराम सहित अनेक प्रमुख कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता उपस्थित रहे।

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