Thursday, February 26, 2026
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“हंसकर खोने और खोकर हंसने” की कला हर इंसान को संघर्षों से सीखने और आगे बढ़ने की देती है प्रेरणा

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन विरोधाभासों का एक सुंदर संगम है, जहाँ सुख-दुख, मिलन-बिछड़़न और लाभ-हानि एक ही सिक्के के दो पहलू “हंसकर खोना और खोकर हंसना” हैं जिनमें विपरीत परिस्थितियों में भी सकारात्मक रहने की हिम्मत चाहिए क्योंकि हंसकर खोना यानी किसी चीज़ को खुशी से छोड़ना या हार स्वीकार करना और खोकर हंसना यानी नुकसान या दर्द के बावजूद मुस्कुराना जो आंतरिक शक्ति, लचीलापन और जीवन के प्रति गहरी समझ दर्शाती है, जो हर इंसान को संघर्षों से सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है ।
“हंसकर खोना” इंसान को उदार बनाता है, जबकि “खोकर हंसना” इंसान को अजेय बनाता है और जो व्यक्ति मुस्कुराहट के साथ इन दोनों कलाओं में माहिर हो जाता है, उसे दुनिया की कोई भी ताकत तोड़ नहीं सकती। यह हिम्मत रातों-रात नहीं आती, बल्कि यह जीवन के अनुभवों, धैर्य और गहरी समझ से विकसित होती है। यदि आप खोने के बाद भी मुस्कुरा सकते हैं, तो विश्वास मानिए, आपने वह सब पा लिया है जिसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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