मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
यह मनुष्य का स्वभाव रहा है कि जब भी उसके पास सामान्य से अधिक कुछ आता है, तो उसके व्यवहार में परिवर्तन आने लगता है। ‘शक्ति’ या ‘ताकत’ एक ऐसा तत्व है, जो यदि सही संतुलन में ना हो, तो मनुष्य के भीतर अहंकार को जन्म देती है। यह शक्ति कई रूपों में शारीरिक बल, अपार ज्ञान, ऊँचा पद या प्रचुर धन आदि में हो सकती है । शक्ति स्वयं में बुरी नहीं है, बल्कि उस शक्ति के प्रति मनुष्य का दृष्टिकोण उसे अहंकारी बनाता है। वास्तव में, सच्ची शक्ति वह है, जो मनुष्य को और अधिक विनम्र बनाए। जिस प्रकार फलों से लदा हुआ पेड़ झुक जाता है, उसी प्रकार वास्तविक शक्तिशाली, ज्ञानी और धनी व्यक्ति वही है, जिसमें अहंकार लेशमात्र भी ना हो।
शक्ति, चाहे किसी भी रूप में हो, मनुष्य के लिए एक परीक्षा होती है। यह उसे महान बना सकती है या उसे गिरा भी सकती है। अहंकार से बचने के लिए हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि यह शक्ति क्षणभंगुर है और हमें इसे जिम्मेदारी से, दूसरों के भले के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। विनम्रता, करुणा और संतुलन ही ऐसी सच्ची शक्ति है, जो हमें अहंकार से बचाकर एक बेहतर इंसान बनाती है और समाज में सम्मान दिलाती है। अहंकार की बजाय सच्ची शक्ति का सही उपयोग ही व्यक्ति को महान बनाता है ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

