
मूकनायक/सत्यशील गोंडाने
बालाघाट
वारासिवनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम झालिवाडा में हुए सरपंच उपचुनाव का परिणाम घोषित हो गया है। लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक खींचतान, आरोप–प्रत्यारोप और जनचर्चाओं के बीच हुए इस उपचुनाव में उमेश्वरी ‘मोनू’ देशमुख ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को 46 मतों के अंतर से पराजित कर सरपंच पद पर जीत दर्ज की।
यह उपचुनाव केवल एक पद की जीत–हार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बीते कुछ महीनों से पंचायत में चले आ रहे अविश्वास प्रस्ताव, सत्ता संघर्ष और गुटबाजी की राजनीति का निर्णायक मोड़ भी माना जा रहा था। चुनाव परिणाम ने स्पष्ट कर दिया कि गांव का जनमत लगभग बराबरी में बंटा हुआ था।
कड़ा मुकाबला, अंतिम दौर तक बना रहा तनाव
मतदान के बाद से ही परिणाम को लेकर गांव में उत्सुकता और तनाव का माहौल बना रहा। मतगणना के प्रत्येक चरण में मुकाबला बेहद कड़ा नजर आया। अंततः 46 मतों के बेहद मामूली अंतर से उमेश्वरी ‘मोनू’ देशमुख ने जीत हासिल की, जो पंचायत स्तर की राजनीति में हर एक मत के महत्व को दर्शाता है।
अविश्वास प्रस्ताव के बाद जनता का फैसला
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले सरपंच पद को लेकर अविश्वास प्रस्ताव की राजनीति ने पूरे गांव को दो धड़ों में बांट दिया था। उसी घटनाक्रम के बाद यह उपचुनाव हुआ, जिसे ग्रामीणों ने सत्ता, नेतृत्व और पंचायत कार्यप्रणाली के मूल्यांकन के रूप में देखा। परिणाम ने पंचायतों में अविश्वास प्रस्तावों की भूमिका को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।
जीत के साथ बढ़ी जिम्मेदारी
जीत के बाद अब उमेश्वरी ‘मोनू’ देशमुख पर गांव में स्थिरता, विकास और पारदर्शिता लाने की बड़ी जिम्मेदारी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि नई सरपंच पंचायत की गुटबाजी से ऊपर उठकर जनहित के मुद्दों पर काम करेंगी और बीते महीनों की राजनीतिक कटुता पर विराम लगेगा।
फिलहाल इतना तय है कि झालिवाडा सरपंच उपचुनाव ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण राजनीति में हर वोट की अहमियत होती है और कभी-कभी कुछ दर्जन मत ही पूरे गांव की राजनीतिक दिशा तय कर देते हैं।

