मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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किसी भी संस्था, समाज या संगठन की सफलता ‘टीम वर्क’ पर निर्भर करती है। यदि किसी कार्यस्थल पर कर्मचारियों के बीच राजनीति, गुटबाजी और आपसी खींचतान शुरू हो जाए, तो संस्था का पतन शुरू हो जाता है। कलह के कारण रचनात्मकता समाप्त हो जाती है और ऊर्जा केवल एक-दूसरे को नीचा दिखाने में व्यर्थ होती है। इससे ना केवल उत्पादन घटता है, बल्कि संस्था की साख भी मिट्टी में मिल जाती है। कलहपूर्ण समाज, संस्था और संगठन कभी भी विश्व पटल पर गर्व से खड़ा नहीं हो सकता।
यदि हम दूसरों के विचारों को धैर्यपूर्वक सुनें, तो आधी गलतफहमियां वहीं खत्म हो जाती हैं। विवाद को बहस से नहीं, बल्कि धैर्यपूर्ण संवाद (Communication) से सुलझाया जा सकता है। ‘विनाशकाले विपरीत बुद्धि’—अर्थात् जब विनाश आता है, तो व्यक्ति की बुद्धि काम करना बंद कर देती है और वह कलह का मार्ग चुनता है। यदि हमें प्रगति करनी है, तो हमें घर, संस्था और समाज में प्रेम और सद्भाव को प्राथमिकता देनी होगी। धैर्य वह अमृत है जो कलह के जहर को खत्म कर सकता है। याद रखें, गिरना आसान है लेकिन सम्भलकर साथ चलना ही मानवता की असली पहचान है।
लेखक:
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

