

आरंभा में किसान संगठनों ने सौंपा ज्ञापन, मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
मूकनायक/सत्यशील गोंडाने
बालाघाट
आरंभा (खैरलांजी)।धान का समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल तथा 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर बोनस की मांग को लेकर आरंभा क्षेत्र के किसानों ने धरना–प्रदर्शन किया। किसान संगठनों के संयुक्त नेतृत्व में आरंभा बाजार चौक पर आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान तहसील प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
किसान गर्जना के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष रामकुमार नगपुरे सहित किसान संगठन भारत, शिवहरे, दुर्गा प्रसाद लिल्हारे, जनपद पंचायत खैरलांजी के उपाध्यक्ष, संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में धान उत्पादक किसान उपस्थित रहे।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। खाद, बीज, कीटनाशक, डीज़ल, बिजली और मजदूरी के बढ़ते दामों के कारण खेती आर्थिक रूप से कठिन होती जा रही है। किसानों का कहना था कि वर्तमान परिस्थितियों में लाभकारी समर्थन मूल्य और बोनस किसानों के लिए आवश्यक हो गया है।
किसान संगठनों ने आरोप लगाया कि चुनावों के समय किसानों से किए गए वादे पूरे नहीं हो पा रहे हैं। बोनस और भुगतान से जुड़ी घोषणाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं, जबकि किसानों को भुगतान के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खेती से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर ठोस समाधान नहीं निकल पा रहा है।
प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित एंबुलेंस की उपलब्धता तथा क्षेत्र में हो रही बिजली कटौती की समस्या को लेकर भी ध्यान आकृष्ट कराया गया और शीघ्र निराकरण की मांग की गई।
किसानों ने बताया कि कर्ज का बोझ बढ़ रहा है, सहकारी समितियों में अव्यवस्थाएं हैं, समय पर खाद-बीज की आपूर्ति नहीं हो पा रही है तथा सिंचाई सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। इन परिस्थितियों में किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
धरना–प्रदर्शन के समापन पर किसान संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि धान के समर्थन मूल्य और बोनस की मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को गांव, तहसील और जिला स्तर तक विस्तार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगामी चरण में आंदोलन को और संगठित रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रदर्शन स्थल पर किसानों के नारे गूंजते रहे—
“हम भीख नहीं, अपना हक मांग रहे हैं।”
किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें पूरी तरह किसान हित से जुड़ी हैं और समय रहते समाधान नहीं होने पर यह आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है।

