मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मानव जीवन उतार-चढ़ावों से भरा है, जिसमें सुख और दुख दोनों ही अभिन्न अंग हैं। लेकिन, इन भावनाओं की अति को हमेशा छिपाकर रखना चाहिए। “हद से ज्यादा खुशी और हद से ज्यादा गम किसी को नहीं बताना चाहिए क्योंकि मानव स्वभाव बड़ा विचित्र है । वह दूसरों की सफलता से जलता है और विफलता पर अक्सर मन ही मन खुश होता है। वहीं हद से ज्यादा गमी पर लोग नमक लगाते हैं”, यह कहावत सदियों से भारतीय संस्कृति में प्रचलित है और जीवन के अनुभवों का निचोड़ है। यह हमें जीवन के संतुलन और लोगों के व्यवहार की सच्चाई सिखाती है।
वहीं जब हम अपने गहरे दुख या कमजोरी को जगजाहिर करते हैं, तो हम खुद को असुरक्षित बना लेते हैं। दुनिया में सहानुभूति दिखाने वाले कम और उपहास करने वाले ज्यादा हैं। लोग अक्सर दूसरों के दुखों को ‘नमक छिड़कने’ या उनकी विफलता का मजाक बनाने का अवसर मान लेते हैं। आपके द्वारा बताई गई कमजोरी भविष्य में आपके खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है। महापुरुषों ने हमेशा ‘मध्यम मार्ग’ अपनाने की सलाह दी है। अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना ही परिपक्वता है। खुशी को विनम्रता के साथ मनाएं और दुख को धैर्य के साथ सहें।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

