मूकनायक/सत्यशील गोंडाने वारासिवनी बालाघाट/मध्य प्रदेश
कैंडल मार्च रैली निकाली, संविधान चौक पर विशाल प्रतिमा पर माल्यार्पण डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के 69वें महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर शनिवार की शाम वारासिवनी नगर में श्रद्धांजलि और समर्पण का अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। सुबह से ही विभिन्न इलाकों से अनुयायी, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्यार्थी, महिलाएँ और युवाओं का समूह कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने लगा था। पूरे नगर में गंभीर, सम्मानपूर्ण और अनुशासित वातावरण रहा।
कैंडल मार्च में उमड़ा सैलाब
शाम होते ही नगर के प्रमुख मार्गों से शांतिपूर्ण कैंडल मार्च रैली निकाली गई। सैकड़ों लोग हाथों में मोमबत्तियाँ लिए बाबा साहेब के चित्र और संवैधानिक संदेशों को साथ लेकर आगे बढ़ते रहे। “जय भीम”, “बाबासाहेब अमर रहें” जैसे नारों से शहर की सड़कों पर प्रेरणा और चेतना का अद्भुत संगम दिखाई दिया। युवाओं और महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही।
संविधान चौक पर प्रतिमा स्थल पर माल्यार्पण
कैंडल मार्च रैली संविधान चौक पहुँचकर एकत्रित हुई, जहाँ डॉ. आंबेडकर की विशाल प्रतिमा पर अनुयायियों ने माल्यार्पण कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रतिमा स्थल पर दीपों की जगमगाहट ने वातावरण को और अधिक भव्य और आध्यात्मिक बना दिया। सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर सामाजिक न्याय के महानायक को स्मरण किया।
वक्ताओं ने कहा— ‘संविधान की रक्षा हमारा कर्तव्य’
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि बाबासाहेब ने अपना संपूर्ण जीवन वंचितों, श्रमिकों और समाज के कमजोर वर्गों को अधिकार दिलाने में समर्पित किया। आज आवश्यकता है कि उनके आदर्शों, शिक्षा, संगठन और संघर्ष के सिद्धांतों को जीवन में उतारा जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह संविधान के मूल्यों— समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व— को सशक्त बनाए।
संगठनों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों, बौद्ध संघ, महिला मंडलों, युवक संगठनों और छात्र समूहों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने यह संकल्प लिया कि बाबासाहेब के विचारों को जन-जन तक पहुँचाकर एक जागरूक और न्यायसंगत समाज का निर्माण किया जाएगा।

