


दमोह (बालाघाट): संविधान निर्माता, भारत रत्न डॉ. बाबा साहब आंबेडकर का 69वां महापरिनिर्वाण दिवस दमोह में अत्यंत श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया। रमाबाई महिला मण्डल एवं डॉ. आंबेडकर मण्डल दमोह के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बाबा साहब के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई और उनके सपनों के भारत को साकार करने का संकल्प लिया गया।प्रज्ञादीप बुद्ध विहार परिसर स्थित डॉ. आंबेडकर प्रतिमा के समक्ष आयोजित इस मुख्य समारोह में पूज्य भंते बोधि धम्म ने दीप प्रज्ज्वलित कर सामूहिक बुद्ध वंदना और त्रिशरण पंचशील का पाठ कराया। वातावरण में शांति और करुणा का समावेश था।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, किसन मेरावी, प्राचार्य (शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण केन्द्र परसवाड़ा), ने बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने ओजस्वी संबोधन में उन्होंने कहा, “डॉ. बाबा साहब आंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक युग, एक आंदोलन थे। वह सर्वहारा समाज के सच्चे मसीहा थे, जिन्होंने हमें अंधकार से निकालकर समानता, न्याय और सम्मान का जीवन जीने का अधिकार दिलाया। उनका सबसे बड़ा योगदान भारतीय संविधान है, जिसने इस देश के हर नागरिक को एक वोट और एक मूल्य की शक्ति प्रदान की। शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन का उनका संदेश आज भी प्रासंगिक है।
बड़ी तादाद में उपस्थित बौद्ध उपासक-उपसिकाओं ने बाबा साहब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और दो मिनट का मौन धारण कर अपने विनम्र भाव प्रकट किए। यह उपस्थिति बाबा साहब के आदर्शों के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक थी।
इस अवसर पर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता आयुष्मान एस. आर. उके, सुखचैन सत्यटेके, जितेन्द्र वासनिक, छब्बीलाल कोल्हेकर, सुन्दरलाल खोबरागड़े, सुमरनलाल खोबरागड़े, आशीष उके, तारेन्द्र उके, राजकुमार (फागू) रामटेके, तथा आयुष्मति संगीता उके, ममता भौतेकर, वंदना भेलावे,स्वेजा उके, चमन रामटेके, तेजलाल उके आदि ने सामाजिक दशा और दिशा पर चिंतन करते हुए एक मजबूत संदेश दिया।
उन्होंने कहा, “बाबा साहब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि केवल उन्हें याद करने में नहीं है, बल्कि उनके सिद्धांतों—’शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो’—को अपने जीवन में आचरण करने में है। हमें उनके सपनों का समतामूलक समाज बनाने के लिए निरंतर कार्य करना होगा, जहाँ सभी को न्याय और अवसर प्राप्त हों।”
कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी मंच संचालन उपसिका सपना रामटेके द्वारा किया गया।

