Thursday, February 26, 2026
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महापरिनिर्वाण दिवस पर मोमबत्ती रैली का आयोजन

बिलासपुर . 6 दिसंबर, संविधान निर्माता एवं महान मानवतावादी भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में संध्या 6:00 बजे एक शांतिपूर्ण मोमबत्ती रैली का आयोजन किया गया।

यह रैली आनंद बुद्ध विहार द्वारा आनंद बुद्ध विहार से प्रारंभ होकर पंचशील कॉलोनी यदुनंदननगर, बाजार चौक होते हुए पुनः आनंद बुद्ध विहार में समाप्त हुई, जिसमें पंचशील नगर व यदुनंदन नगर कॉलोनी के नागरिकों ने बड़ी संख्या में सम्मिलित होकर सहभागिता निभाई।

शाम की इस रैली में सभी समाजबंधुओं ने मिलजुलकर चलकर डॉ. अम्बेडकर की शिक्षाओं—मानवता, समानता और करुणा—का संदेश प्रतिमा स्थल पर समाज के प्रमुख जनों ने बाबा साहेब की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा की आज का दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं है, बल्कि आज का दिन उस महापुरुष को स्मरण करने का दिन है,जिन्होंने लाखों-करोड़ों लोगों की ज़िंदगी का रास्ता बदल दिया। 6 दिसंबर डॉ. बाबा साहब अंबेडकर जी के महापरिनिर्वाण दिवस के पावन अवसर पर हम सब यहाँ एकत्र हुए है , शोक के लिए नहीं, बल्कि कृतज्ञता के साथ उनके विचारों को आगे ले जाने के संकल्प के लिए।
उन्होंने कहा कि “बाबा साहब ने हमें सिर्फ अधिकार नहीं दिए हमें इंसान होना सिखाया| आज हमारा बौद्ध समाज, हमारी बेटियाँ, हमारे युवा , उनकी इसी शिक्षा का जीवंत प्रमाण हैं।
और कहा कि बाबा साहब ने तीन मंत्र दिए शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो। ये केवल नारे नहीं हैं ये जीवन को ऊँचाई देने वाले सिद्धांत हैं। आज हमारा कर्तव्य है कि शिक्षा को घर-घर पहुँचाना ,बाबा साहब ने बुद्ध के धम्म को इसलिए अपनाया क्योंकि उसमे वैज्ञानिक सोच, करुणा, बराबरी और शांति है। आज जब दुनिया विभाजनों में उलझ रही है, तब बुद्ध का मार्ग और अधिक आवश्यक हो गया है।हमें अपने कर्मों से यह दिखाना है कि , बौद्ध समाज केवल उपासना का नहीं, बल्कि परिवर्तन और मानवता का समाज है। आज का संकल्प इस महापरिनिर्वाण दिवस पर हम सब संकल्प लें कि अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देंगे समाज में भेदभाव और अज्ञान के खिलाफ खड़े रहेंगे एक-दूसरे के प्रति मैत्री, करूणा और सम्मान बढ़ाएँगे
यही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही है कि हम उनके सपनों को अपना व्यवहार बना दें।
अंत में कहा कि महापुरुष कभी जाते नही
वे अपने विचारों के रूप में हमेशा जीवित रहते हैं।
आज हम बाबा साहब के स्मरण में सिर झुकाते हुए उनके दर्शन और विचारों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया ।एकत्रित होकर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए और बाबासाहेब के बताए आदर्शों पर चलने का संकल्प लिए । बौद्ध समाज के द्वारा आयोजित रैली में सैकड़ों की संख्या में बच्चे और समाज के लोग सम्मिलित हुए मोमबत्तियों की रोशनी के साथ लोगों ने बाबा साहेब के प्रति श्रद्धा व्यक्त की और समाज में शांति, सद्भाव व समता के संकल्प को दोहराया।

इस अवसर पर उपस्थित समाजजनों ने बाबा साहेब की सीख को स्मरण किया कि—“जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए।”

कार्यक्रम को सफल बनाने में बौद्ध समाज, स्थानीय युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठजनों का विशेष योगदान रहा।

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