मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अज्ञानता दूर की जा सकती है, लेकिन मूर्खता हमेशा बनी रहती है। जो लोग अपनों के खिलाफ साजिशें करते हैं, वह अक्सर गैरों की गुलामी करते नज़र आते हैं। अज्ञानता और मूर्खता दोनों ही प्रगति में बाधा डाल सकती हैं। अज्ञानता को शिक्षा के प्रकाश से दूर किया जा सकता है, जिससे व्यक्तिगत और सामाजिक विकास होता है। दूसरी ओर, मूर्खता अधिक जटिल है क्योंकि यह व्यक्तिगत पसंद, पूर्वाग्रहों और तर्क की कमी से उत्पन्न होती है।अज्ञानता खाली दिमाग की स्थिति है, जिसे भरा जा सकता है, जबकि मूर्खता एक भरे हुए दिमाग की खराब कार्यप्रणाली है।
ज्ञान प्राप्त करना महत्वपूर्ण अवश्य है, लेकिन उस ज्ञान का बुद्धिमानी से उपयोग करना (मूर्खता से बचना) एक विवेकपूर्ण और सफल जीवन की कुंजी है। समाज को आगे बढ़ने के लिए ना केवल अज्ञानता को शिक्षा से, बल्कि मूर्खता को तर्क और विवेक से दूर करने की आवश्यकता है। एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए, हमें न केवल अज्ञानता को दूर करने के लिए ज्ञान का प्रसार करना चाहिए, बल्कि तर्कसंगत सोच और बुद्धिमानीपूर्ण निर्णय लेने के मूल्यों को भी बढ़ावा देना चाहिए, ताकि मूर्खतापूर्ण व्यवहार पर अंकुश लगाया जा सके।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

