मूकनायक /आकाश घरडे़
बालाघाट/ मध्य प्रदेश
सभी बुद्ध विहारों व प्रतिमा स्थलों भाव पूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित करे अनयायु
बालाघाट _भारत देश के आजाद होने के पूर्व अंग्रेजों के द्वारा लंदन (इंग्लैंड) में वर्ष 1930 1931 1932 तीन बार गोलमेज सम्मेलन हुए जिसमें कुल 89 लोग शामिल हुए जिसमें 16 ब्रिटेन के 53 भारतीय प्रतिनिधि थे जिसमें परम पूज्य डॉ बाबा साहब अंबेडकर जी सबसे कम उम्र युवा थे परम् पूज्य डॉ बाबा साहब अंबेडकर जी की युवा अवस्था को देख सभी लोग आश्चर्यचकित थे की ये नौजवान क्या करेगा किन्तु सभी प्रतिनिधियों परम पूज्य डॉ बाबा साहब अंबेडकर जी का भाषण सबसे प्रभावशाली रहा जिसकी वजह से अनेकों समितियों में शामिल किया गया था
2 सितम्बर 1946को अंतरिम सरकार बनी जिसमें कानून मंत्री का दायित्व सौंपा गया । 15 अगस्त 1947को भारत देश आजाद हुआ 29 अगस्त 1947को भारतीय संविधान के मसौदा समिति का गठन किया गया जिसमें परम पूज्य डॉ बाबा साहब अंबेडकर जी को अध्यक्ष चुना गया।मसौदा समिति के अध्यक्ष चुने जाने पर मसौदा तैयार किया गया और 21 फरवरी 1948को संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद जी को सौंप दिया गया संविधान सभा में 11 सत्र हुए, 11 सत्रों में 165 दिन लगे जिसमें 114दिन संविधान सभा के प्रारूप पर विचार किया गया
अधिवक्ता संजय खोबरागड़े जिला अध्यक्ष बालाघाट जिला बौद्ध संघ बालाघाट ने बताया की भारत देश में विभिन्न धर्म वर्ग जातियां, उपजातियां साथ ही साथ विभिन्न भाषा बोलिया होने के उपरांत भी समूचे भारत को एकता और अखंडता में बनाए रखने हेतु समता समानता बंधुत्व व न्याय पर आधारित संविधान की रचना की जो विश्व का विशालतम संविधान है
अधिवक्ता संजय खोबरागड़े (संविधान रत्न & भीम रत्न से सम्मानित) ने बताया कि दुनिया के 6 महानतम विद्वान 1 कार्ल माक्स (जर्मनी) 2 लेनिन (रूस) 3 डॉ अब्राहम लिंकन 4 मांओतसुग (चीन)5 आइंस्टीन 6 परम पूज्य डॉ बाबा साहब अंबेडकर जी दुनियाभर के विद्वानों से सर्वश्रेष्ठ परम् पूज्य डॉ बाबा साहब अंबेडकर जी को स्वीकार किया परम् पूज्य डॉ बाबा साहब अंबेडकर जी का 6 दिसम्बर 1956 को दिल्ली में महापरिनिर्वाण हुआ तथा 7 दिसंबर 1956को मुंबई दादर में अंतिम संस्कार हुआ परम पूज्य डॉ बाबा साहब अंबेडकर जी 16 दिसंबर 1956को मुंबई में धम्म दीक्षा देने वाले थे किन्तु 6 दिसम्बर 1956 को महापरिनिर्वाण होने से 7 दिसम्बर 1956को परम् पूज्य डॉ बाबा साहब अंबेडकर जी के शव को साक्षी मानकर 10 लाख लोगों ने धम्म दीक्षा ग्रहण की I तमाम बौद्ध उपासक उपासिकाये व सामाजिक धार्मिक राजनीति क संस्थाओं से आग्रह है भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित करें भारतीय संविधान की प्रस्तावना पढ़ अंगीकार करे
राष्ट्र की एकता व अखंडता को बनाए रखने दृढ़ संकल्पित हो।

