


बिलासपुर।संविधान दिवस के अवसर पर अंबेडकर युवा मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य थीम “एक व्यक्ति – एक वोट – एक मूल्य” रखा गया। बच्चों द्वारा संविधान की प्रस्तावना का वाचन, तिरंगा गीत पर सामूहिक नृत्य और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अंबेडकर युवा मंच ने संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। इस अवसर पर खेल, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रतिभाशाली युवाओं को बिरसा–फूले–अंबेडकर सम्मान से सम्मानित किया गया।
कंचना यादव का संबोधन : “संविधान की ताकत को कोई खत्म नहीं कर सकता”
मुख्य वक्ता, जेएनयू शोधकर्ता एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता कंचना यादव ने कहा कि आज भी सिस्टम में बैठे लोग समाज के कमजोर वर्गों की आवाज़ दबाने की कोशिश करते हैं, लेकिन बाबा साहेब के दिए संविधान ने सबको समान अधिकार और लड़ने की शक्ति दी है।
उन्होंने कहा—
“जो लोग आपातकाल को संविधान हत्या दिवस बताये है जबकि हमारे संविधान की हत्या कोई नहीं कर सकता ।आज जो लोग आपातकाल और संविधान की हत्या की बात करते हैं, वे चाहें तो आज इमरजेंसी घोषित करके दिखाएं। यह संविधान की ताकत है कि आज कोई ऐसा करने की हिम्मत नहीं रखता।”
“यह संविधान ही है जिसने दलित, पिछड़े और सभी वंचित वर्गों को संघर्ष की राह में अवसर और अधिकार दिए।”
“मनुवाद और सामाजिक विषमता समाज को पीछे ले जाती हैं। संविधान इन विचारों को चुनौती देता है और सभी के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करता है।”
कंचना यादव ने कहा कि “एक व्यक्ति – एक वोट – एक मूल्य” की अवधारणा ही लोकतंत्र की ताकत है। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर गहरी चिंता जाहिर की और कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार हमलों से लोकतंत्र कमजोर होगा।
डॉ. सुनील कुमार सुमन का वक्तव्य : “धर्म आधारित राष्ट्र की बात करना गैरकानूनी”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सुनील कुमार सुमन, सहायक प्रोफेसर, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा, ने कहा कि संविधान का लाभ सबसे अधिक उन वर्गों को मिला है, जो सदियों से वंचित रहे।
उन्होंने कहा—
“हिंदू राष्ट्र बनाने की बात करना ही असंवैधानिक है, क्योंकि भारत सभी धर्मों, जातियों और समुदायों का देश है।”
“बाबा साहेब ने जिस समानता, न्याय और स्वतंत्रता की नींव रखी थी, वही आज भी देश को मजबूत बनाए हुए है।”
“पिछले कुछ वर्षों में लोकतंत्र कमजोर हुआ है, संस्थाओं पर हमले बढ़े हैं, और यह बेहद चिंताजनक है।”
उन्होंने मिनीमाता, आदिवासी अधिकार, पर्यावरण संरक्षण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व आदि मुद्दों पर अपनी राय रखी। सामाजिक न्याय की दिशा में संविधान को ढाल बताते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को इसे बचाने की भूमिका निभानी होगी।
प्रतिभाओं को मिला बिरसा–फूले–अंबेडकर सम्मान➖
दिवंगत सुरेश रामटेके की स्मृति में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इनमें शामिल हैं—
मधुरिमा बर्मन, राका सोनी, श्रेया गोंड, अजीत कुजूर, प्रीति टंडन, गरिमा वाहने, निकिता खोबरागड़े, जयंत सोनवानी, प्रवज्ज्या वाहने, शाहरुख अली, सरोज मांझी डाहिरे, दिनकर, हीना खान, अखिल वर्मा, राजेंद्र गायकवाड़ सहित कई प्रतिभाशाली युवक-युवतियां।
संगीत, प्रस्तावना व सामूहिक प्रस्तुति➖
कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय संविधान की प्रस्तावना के वाचन से हुई।
बच्चों ने सामूहिक गीत, बहुजन महापुरुषों पर आधारित गीत और “साक्षर से शिक्षित की ओर” ईवनिंग क्लास के छात्रों की विशेष प्रस्तुति ने कार्यक्रम को आकर्षक बनाया।
कपिल चौरे ने बाबा साहेब व संविधान पर गीत प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की सफलता में अनेक कार्यकर्ताओं का योगदान➖
कार्यक्रम को सफल बनाने में संघमित्रा वाहने, वर्षा रामटेके, रश्मि नागदौने, प्रज्ञा मेश्राम, महिमा पारेकर, नमिता अंबादे, नितेश अंबादे, सागर हुमने, मिलिंद खोब्रागड़े, देवेन्द्र मोटघरे, सुमित दामके, जावेद खान, राजा नंदेश्वर, सुनील जामुलकर सहित मंच के अनेक सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बौद्ध समाज के वरिष्ठ मार्गदर्शकों — हरीश वाहने, सुखनंदन मेश्राम, नारायण राव हुमने, मगन गेडाम, अशोक वाहने, नरेंद्र रामटेके, एम.आर. बाम्बोडे, दिलीप मेश्राम समेत अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
कार्यक्रम का संचालन संघमित्रा वाहने, देवेंद्र मोटघरे, मिलिंद खोब्रागड़े, प्रज्ञा मेश्राम एवं रश्मि नागदौने ने किया।
आभार प्रदर्शन नितेश अंबादे ने व्यक्त किया।
संविधान दिवस का यह आयोजन सामाजिक चेतना, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने का एक प्रभावशाली प्रयास साबित हुआ।

