मूकनायक / सत्यशील गोंडाने
बालाघाट/वारासिवनी झालिवाड़ा
आदिवासी समाज के महान स्वतंत्रता सेनानी, जननायक और ‘उलगुलान’ आंदोलन के प्रणेता भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर बालिका छात्रावास झालीवाड़ा में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्रावास की छात्राएँ, अधिकक्षक पटेल शिक्षकगण, अडमे जी स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता तथा ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पित कर की गई। छात्राओं ने उनके जीवन, संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका पर आधारित गीत, भाषण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। उपस्थित सभी ने एक स्वर में कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक न्याय, आत्मसम्मान और आदिवासी पहचान के प्रतीक हैं।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में बताया कि बिरसा मुंडा ने अपने अल्प जीवन काल में अंग्रेजी शासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ “उलगुलान” जैसा विराट जनआंदोलन खड़ा किया, जिसने आदिवासी समाज को अपने अधिकारों और अस्तित्व के लिए एकजुट होने की प्रेरणा दी। उनकी शिक्षाएँ आज भी समाज सुधार, जल-जंगल-जमीन के संरक्षण और सामाजिक एकता की दिशा में मार्गदर्शन करती हैं।
छात्रावास की अधिक्षक ने कहा कि बच्चियों को ऐसे महान व्यक्तित्वों की जीवनी से प्रेरणा लेनी चाहिए और शिक्षा के साथ-साथ समाज सेवा व संस्कृति संरक्षण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
कार्यक्रम में छात्रों को बिरसा मुंडा के जीवन से जुड़े तथ्य और आदिवासी इतिहास पर आधारित पुस्तिकाएँ भी वितरित की गईं।
अधिक्षक महोदया ने कहा कि आदिवासी स्वाभिमान के प्रतीक बिरसा मुंडा की जयंती केवल उत्सव नहीं, बल्कि अपनी विरासत और संघर्षमयी इतिहास को याद करने का अवसर है। समाज में न्याय, समानता और अधिकारों के लिए उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस समय थे।
कार्यक्रम का समापन देश और समाज की उन्नति के लिए सामूहिक संकल्प के साथ किया गया।

